Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

नई दिल्ली, 04 जनवरी (हि.स.)। सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों को बचाने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने लोगों से बिना डरे आगे आने की अपील की है। सड़क दुर्घटना के शुरुआती एक घंटे (गोल्डन आवर) में घायलों की मदद करने वाले राहवीर (गुड समेरिटन) को कानूनी कार्रवाई, पुलिस हिरासत और व्यक्तिगत विवरण साझा करने की बाध्यता से पूर्ण संरक्षण प्राप्त है। सरकार ऐसे मददगारों को घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाने पर 25000 रुपये नकद पुरस्कार और प्रशंसा प्रमाणपत्र दे रही है। एक व्यक्ति को साल में 5 बार तक यह सम्मान दिया जा सकता है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 2020 में मोटर व्हीकल्स (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134ए के तहत राह वीर नियम अधिसूचित किए थे। इन नियमों के तहत मदद करने वाले व्यक्ति को सिविल या क्रिमिनल दायित्व से मुक्त रखा गया है। नियमों के अनुसार, मदद के दौरान राहवीर को नाम, पता या फोन नंबर बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पुलिस द्वारा अनावश्यक पूछताछ, हिरासत या रोक पर भी प्रतिबंध है। अस्पताल में आपातकालीन इलाज का शुल्क मददगार से नहीं लिया जा सकता। यदि कोई राहवीर गवाह बनना चाहता है तो उससे केवल एक बार बयान लिया जाएगा, वह भी सुविधाजनक समय और स्थान पर।
बयान में कहा गया कि गंभीर चोट के बाद पहला एक घंटा गोल्डन आवर कहलाता है। इस अवधि में त्वरित मदद मौत और स्थायी विकलांगता के जोखिम को काफी कम कर सकती है। सहायता के लिए चिकित्सकीय प्रशिक्षण या विशेष उपकरण जरूरी नहीं है, केवल अच्छी नीयत और इंसानियत काफी है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पहले कहा था कि सड़क दुर्घटनाओं से भारत को जीडीपी का करीब 3 प्रतिशत नुकसान होता है। मंत्रालय ने कहा कि कई मौतें समय पर मदद न मिलने से होती हैं क्योंकि बायस्टैंडर्स पुलिस और कानूनी डर से हिचकिचाते हैं। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की कि दुर्घटना देखते ही बिना डर मदद के लिए आगे आएं, क्योंकि राहवीर बनकर उठाया गया एक कदम किसी की जान बचा सकता है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर