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काठमांडू, 04 जनवरी (हि.स.)। जेन-जी आंदोलन के नाम पर 8 और 9 सितंबर को हुई तोड़फोड़ और हिंसा की जांच के लिए गठित, पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जांच आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से बयान लिया है।
आयोग की टीम ओली के भक्तपुर जिले के गुंडू स्थित निवास पर पहुंची और उन्हें सात दिनों के भीतर बयान प्रस्तुत करने का पत्र सौंपा। हालांकि, ओली ने तुरंत ही अपने निवास पर लगभग 60 सवालों के जवाब देते हुए लिखित बयान प्रदान कर दिया।
स्रोत के अनुसार, नोटिस देने गई टीम को ही ओली ने अपना लिखित बयान सौंप दिया। आयोग के सदस्य तथा पूर्व डीआईजी विज्ञान राज शर्मा ने भी रविवार को गुंडू में नोटिस सौंपे जाने की पुष्टि की।
आयोग 8 और 9 सितंबर की घटनाओं से जुड़े लगभग सभी व्यक्तियों के बयान पहले ही दर्ज कर चुका है। पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी आयोग कार्यालय में उपस्थित होकर बयान देने के लिए बुलाया गया था।
हालांकि, ओली ने सिंहदरबार स्थित आयोग कार्यालय में उपस्थित होकर बयान देने से इंकार कर दिया था। उनके इस रुख के चलते आयोग की टीम को उनका बयान लेने के लिए गुंडू जाना पड़ा।
लगभग 60 प्रश्न पूछे जाने के बावजूद, आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने ओली के लिखित बयान की सामग्री सार्वजनिक नहीं की है।
ओली का कहना था कि वह आयोग अध्यक्ष गौरी बहादुर कार्की की क्षमता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठाते हैं। उनका आरोप था कि कार्की ने आयोग अध्यक्ष बनने से पहले ही तत्कालीन सरकार के राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों के बारे में राय बना ली थी, इसलिए वह उनसे निष्पक्ष रूप से बयान नहीं ले सकते।
ओली ने यह भी कहा था कि यदि आयोग की टीम उनके निवास पर आती है तो वह उन्हें शालीनता से स्वीकार करेंगे और चाय भी पिलाएंगे। वह सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली सरकार को अवैध बताते हुए आयोग को ही भंग करने की मांग भी करते रहे हैं।
शुरुआत में, आयोग ने चेतावनी दी थी कि यदि ओली लगातार बयान देने से इंकार करते रहे तो उन्हें गिरफ्तार कर बयान दर्ज किया जाएगा। हालांकि, यूएमएल के 11वें महाधिवेशन के बाद ओली की राजनीतिक स्थिति मजबूत होने के चलते आयोग ने यह कदम पीछे हटा लिया।
ओली के आक्रामक बयानों के चलते आयोग रक्षात्मक मुद्रा में दिखाई देने लगा और अंततः उनकी ही शर्तों के अनुसार टीम गुंडू पहुंची तथा उनका लिखित बयान लेकर लौट आई।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास