Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

- सुपर स्पेशियलिटी पंचकर्म विंग में विदेशी एवं एनआरआई रोगियों की बढ़ती संख्या
भोपाल, 04 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान का चिकित्सालय आयुर्वेद आधारित वैज्ञानिक एवं समग्र चिकित्सा पद्धति के कारण प्रदेश ही नहीं, बल्कि प्रदेश के बाहर, विदेशों एवं एनआरआई रोगियों के लिए भी प्रमुख उपचार केंद्र के रूप में उभर रहा है। विशेष रूप से सुपर स्पेशियलिटी पंचकर्म विंग में स्वास्थ्य लाभ के लिए विदेशी नागरिकों एवं एनआरआई का रूझान लगातार बढ़ रहा है। चिकित्सालय में पैरालिसिस, गठियावात, संधिवात, त्वचा रोग, न्यूरोलॉजिकल रोग, श्वास रोग, पाइल्स एवं फिस्चुला, बच्चों की जन्मजात बीमारियाँ, स्त्रीरोग तथा नेत्र के जटिल एवं असाध्य रोगों का प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार किया जा रहा है।
संस्थान के प्रधानाचार्य एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. उमेश शुक्ला ने रविवार को बताया कि संस्थान में 200 शैय्याओं वाला अंतरंग विभाग, ओपीडी एवं विभिन्न स्पेशियलिटी क्लीनिक्स, शल्य चिकित्सा हेतु पृथक ऑपरेशन थियेटर, पंचकर्म केन्द्र, कियाकल्प इकाई, योग एवं आहार चिकित्सा केन्द्र तथा आधुनिक निदान केन्द्र संचालित हैं। निदान केन्द्र में रक्त, मूत्र सहित विभिन्न पैथोलॉजी जाँच, एक्स-रे, ईसीजी, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट एवं सीटी स्कैन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। संस्थान अंतर्गत सभी रोगियों को शासन द्वारा निःशुल्क औषधियाँ उपलब्ध कराई जाती हैं तथा चिकित्सालय में 24 घंटे चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ की सेवाएँ उपलब्ध रहती हैं। आहार, योग एवं फिजियोथैरेपी को भी उपचार प्रक्रिया में सम्मिलित किया गया है।
उन्होंने बताया कि चिकित्सालय में एविडेंस बेस्ड आयुर्वेद चिकित्सा को प्राथमिकता देते हुए वैज्ञानिक पद्धति से नाड़ी परीक्षण, उपयुक्त औषधीय चिकित्सा, आवश्यकतानुसार पंचकर्म एवं शल्य चिकित्सा, पथ्य-आहार, योग एवं फिजियोथैरेपी के माध्यम से उपचार किया जाता है। इन्हीं प्रभावी व्यवस्थाओं का परिणाम है कि संस्थान की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 700 रोगी उपचार के लिए आ रहे हैं तथा आईपीडी में 90 प्रतिशत से अधिक बेड ऑक्यूपेंसी बनी हुई है। वर्ष 2025 में संस्थान में ओपीडी रोगियों की संख्या लगभग 01 लाख 85 हजार 100, आईपीडी रोगियों की संख्या लगभग 50 हजार 929, पंचकर्म थैरेपी लगभग 01 लाख 80 हजार तथा पैथोलॉजी जाँच लगभग 01 लाख रही है।
डॉ. शुक्ला ने जानकारी दी कि संस्थान में आयुर्वेद आधारित गर्भिणी परिचर्या एवं गर्भ संस्कार के माध्यम से प्रसूति सेवाएँ भी सुदृढ़ की गई हैं, जिससे सिजेरियन डिलेवरी में कमी देखी जा रही है। साथ ही इन्फर्टिलिटी उपचार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। ठण्डी के मौसम में पाइल्स एवं फिस्चुला के रोगियों द्वारा क्षारसूत्र चिकित्सा के लिए बड़ी संख्या में संस्थान का रुख किया जा रहा है। उच्च गुणवत्ता वाली पंचकर्म चिकित्सा, योग्य विशेषज्ञ चिकित्सक एवं प्रशिक्षित थैरेपिस्ट के कारण रोगियों की प्रतीक्षा अवधि भी न्यूनतम हो गई है। संस्थान में ऋतु आधारित आहार, योग, दिनचर्या एवं ऋतुचर्या को सम्मिलित करते हुए पंचकर्म आधारित वेलनेस को प्रोत्साहित किया गया है। इसके लिए पृथक पंचकर्म सुपर स्पेशियलिटी वेलनेस सेन्टर स्थापित किया गया है। सेन्टर की साफ-सफाई एवं आहार गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टूरिज्म कॉर्पोरेशन के साथ अनुबंध किया गया है।
उल्लेखनीय है कि भोपाल नगर निगम द्वारा शहर के चिकित्सालयों में स्वच्छता के लिए संस्थान चिकित्सालय को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर