लखनऊ : 15 दिनों तक गूंजेगी लोक संस्कृति, जीवंत होगा उत्तरायणी कौथिग उत्सव
गोमती तट पर जश्न-ए-पहाड़, उत्तरायणी कौथिग 2026 का भव्य आगाज 14 जनवरी से लोकगीतों में झलकेगा पहाड़ की पीड़ा और गर्व, जैविक अनाज बिखेरेगी खुशबू लखनऊ, 04 जनवरी (हि.स.)। जब ढोल-दमाऊ की थाप पर झोड़ा-यडिया की लय थिरकेगी, लोकगीतों में पहाड़ की पीड़ा और
उत्तरायणी कौथिग उत्सव


गोमती तट पर जश्न-ए-पहाड़, उत्तरायणी कौथिग 2026 का भव्य आगाज 14 जनवरी से

लोकगीतों में झलकेगा पहाड़ की पीड़ा और गर्व, जैविक अनाज बिखेरेगी खुशबू

लखनऊ, 04 जनवरी (हि.स.)। जब ढोल-दमाऊ की थाप पर झोड़ा-यडिया की लय थिरकेगी, लोकगीतों में पहाड़ की पीड़ा और गर्व झलकेगा और गोमती तट पर ऊनी वस्त्रों, बाल मिठाई व जैविक अनाज की खुशबू बिखरेगी- तब समझिए लखनऊ में उत्तरायणी कौथिग 2026 अपने पूरे वैभव के साथ जीवंत हो चुका होगा। उत्तरायणी कौथिग नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ सर्वसमाज को प्रेम, सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का संदेश देगा।

पर्वतीय महापरिषद लखनऊ अपने समाज एवं संस्कृति सेवा के 25 वर्ष (रजत जयंती वर्ष) पूरे होने के उपलक्ष्य में 14 से 28 जनवरी 2026 तक 15 दिवसीय इस ऐतिहासिक आयोजन का भव्य आयोजन कर रहा है। भारत रत्न पं. गोविन्द बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन बीरबल साहनी मार्ग (खाटू श्याम मंदिर के निकट) गोमती तट पर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक चलने वाला यह कौथिग पूरी तरह निःशुल्क होगा।

शोभायात्रा से होगी शुरुआत

14 जनवरी को उत्तराखंड के संत-महात्माओं की उपस्थिति में रामलीला मैदान से मेला स्थल तक निकलने वाली विशाल शोभायात्रा कौथिग की भव्य शुरुआत करेगी। इस दौरान पर्वतीय गौरव से जुड़े विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।

सेना दिवस, नारी शक्ति और लोक परंपराओं का संगम

15 जनवरी को सेना दिवस पर भारतीय सेना को समर्पित विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके साथ ही अपनी भाषा-बोली पर वक्तृत्व प्रतियोगिता, लोक गाथाओं पर आधारित नृत्य-नाटिकाएं, झोड़ा-यडिया की 40 टीमों के साथ 2000 से अधिक महिलाओं की सहभागिता कौथिग को नारी शक्ति का उत्सव बनाएगी।

नामी कलाकार लोकगीतों के मधुर स्वर से बांधेंगे समां

पारंपरिक छपेली नृत्य प्रतियोगिता 'झूमिगो-2026' (सेशन-4) में कुल एक लाख रुपये के आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं। वहीं 'पहाड़ी धुनों पर देसी ठुमका' प्रतियोगिता और विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां दर्शकों को बांधे रखेंगी। प्रतिदिन होने वाली स्टार नाइट में लोकगीतों के नामी कलाकार समां बांधेंगे।

कौथिग में समाज से जुड़ी पहल, आंदोलनकारियों का होगा सम्मान

माता-पिता पूजन का सामूहिक कार्यक्रम, उत्तराखंड के राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान और समाज के 25 लब्धप्रतिष्ठ एवं महापरिषद के पूर्व पदाधिकारियों का अभिनंदन कौथिग को सामाजिक सरोकारों से जोड़ता है। विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग के सामान्य व व्यक्तिगत सत्र भी खास आकर्षण होंगे।

200 से अधिक स्टॉल, पहाड़ की पूरी दुनिया एक जगह

मेले में 200 से अधिक स्टॉलों पर जैविक दालें, मसाले, सब्जियां, फल, अल्मोड़ा की मशहूर बाल मिठाई, ऊनी वस्त्र, बर्तन और कृषि उत्पाद उपलब्ध रहेंगे। मानो पूरा पहाड़ गोमती तट पर सिमट आया हो।

उत्तरायणी कौथिग : आस्था, इतिहास और जनचेतना का जीवंत उत्सव

पर्वतीय महापरिषद उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष गणेश चन्द्र जोशी ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद लखनऊ की 32 सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं की ओर से गठित शीर्ष संस्था पर्वतीय महापरिषद अपने समाज एवं संस्कृति सेवा के 25 वर्ष पूर्ण कर रही है। विगत 17 वर्षों से आयोजित हो रहा उत्तरायणी कौथिग इस बार और भी दिव्य-भव्य होगा। इसमें पर्वतीय लोक कला, लोक संस्कृति और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ 150 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे।

उत्तरायणी मेले से जुड़ा कुली बेगार आंदोलन का इतिहास

उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति पर सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश को उत्तराखण्ड में उत्तरायणी कहा जाता है। इसी अवसर पर लगने वाले मेलों को कौथिग या कौतिक कहा जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक चेतना का भी प्रतीक है। इसी दिन बागेश्वर में अंग्रेजी हुकूमत की कुली बेगार प्रथा के विरोध में जनआंदोलन की शुरुआत हुई थी। हजारों लोगों ने सरयू-गोमती के संगम पर कुली रजिस्टर फाड़कर बहा दिए थे, जिसे उत्तराखण्ड के स्वतंत्रता संग्राम की पहली चिंगारी माना जाता है।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश