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- शहर में जीबीएस (गुइलेन-बैरे सिंड्रोम) का कोई मरीज नहीं मिला, क्षेत्र के सभी बोरिंगों और होज का होगा क्लोरिनेशन
इंदौर, 04 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 16 मौतों के बाद क्षेत्र में पानी की टेस्टिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रविवार को कोलकत्ता, दिल्ली और भोपाल से विशेषज्ञ डॉक्टर्स की टीम इंदौर पहुंची और घटना को लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा के साथ बैठक की। कोलकत्ता से आई टीम में वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष, वैज्ञानिक डॉ.गौतम चौधरी और दिल्ली के एनसीडीसी के डॉ.अनुभव शामिल हैं।
बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने भागीरथपुरा क्षेत्र में स्थित सभी बोरिंगों का क्लोरिनेशन किया जायेगा। साथ ही घरों में बेसमेंट में बने होज को क्लीन कर उसका भी क्लोरिनेशन किया जायेगा। उसके बाद ही क्षेत्र के नागरिक बोरिंगों के पानी का इस्तेमाल करेंगे। इस अवसर पर अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.माधव प्रसाद हसानी, डॉ.अश्विन भागवत, डॉ.अभिजीत प्रकार, डॉ.सविता अखण्ड डॉ. सैलविया, शैलेन्द्र कुमार, डॉ.अंशुल मिश्रा,डॉ.रूपामी जोशी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर वर्मा ने कहा कि शहर में जीबीएस (गुइलेन-बैरे सिंड्रोम) बीमारी का कोई भी मरीज नहीं पाया गया। भागीरथपुरा क्षेत्र में कोलकत्ता, दिल्ली और भोपाल से आई टीम, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित विभागों के साथ मिलकर पानी की जाँच कर रही है। जहाँ पर दूषित पानी पाया जाएगा,उसे चिन्हित कर उचित प्रबंध किया जायेगा। साथ ही क्षेत्रीय नागरिकों को भी जागरुक किया जा रहा है कि वे अपने बोरिंग और होज का क्लोरिनेशन कराने में सहयोग दें। इसके लिये भागीरथपुरा के पूरे क्षेत्र को 30 से अधिक बीटों में बांटा किया गया। हर बीट में कर्मचारियों और नागरिकों के साथ मिलकर क्लोरिनेशन का कार्य किया जायेगा। इसके लिये पूरे क्षेत्र को अवगत कराया जा रहा है।
कोलकत्ता से आई वैज्ञानिक और डॉक्टरों की टीम दूषित पानी की जाँच करेगीकलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि कोलकत्ता से आये वैज्ञानिक डॉ.प्रमित घोष और वैज्ञानिक डॉ. गौतम चौधरी दूषित जल के सेम्पल लेकर उसका वैज्ञानिक तरीके से जाँच करेगी। इसके लिये उक्त टीम भागीरथपुरा क्षेत्र में पानी के रेण्डम सेम्पल एकत्रित करेगी। इस कार्य में उक्त टीम नगर निगम, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेगी। इसका मकसद नागरिकों को शुद्ध जल उपलब्ध कराना है। साथ ही घटना के हर पहलुओं की निगरानी कर कारण तलाशने में मदद करेगी।
कलेक्टर ने कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में स्टेट सर्विलांस और विशेषज्ञ डॉक्टर्स की टीम द्वारा माइक्रो लेवल पर निगरानी का कार्य किया जा रहा है। सामुदायिक स्तर पर भी स्थानीय नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। भागीरथपुरा क्षेत्र में टेंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल वितरित कराया जा रहा है। नागरिकों को पानी उबलकर पीने की समझाइश दी जा रही है। पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिये क्लोरिन (लिक्विड) भी दिया जा रहा है। दूषित पेयजल से विभिन्न अस्पतालों में प्रभावितों का बेहतर उपचार किया जा रहा है। उन्हें आवश्यक दवाइयाँ,इंजेक्शन आदि प्रदान किये जा रहे हैं। शहर के जिन क्षेत्रों में दूषित पानी की शिकायतें मिल रही हैं,वहाँ पानी के रेण्डम सैम्पल लिये जा रहे हैं। घर-घर जाकर सर्वे करने का कार्य भी जारी है।
प्रभावितों के उपचार के साथ ही क्षेत्र में शुद्ध जल प्रदाय करने पर प्रशासन का फोकसकलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने रविवार को नगर निगम अमले के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र में पहुंचकर जलजनित घटना के नियंत्रण के लिये किये जा रहे उपायों के बारे में जानकारी ली, साथ ही क्षेत्रीय नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की समझाइश भी दी। उन्होंने क्षेत्रीय नागरिकों से चर्चा की और उन्हें आश्वस्त किया कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
कलेक्टर ने कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र के नागरिकों को शुद्ध जल मिले, साथ ही बोरिंगों में भी शुद्ध पानी प्राप्त हो, इसके लिये माइक्रो लेवल पर कार्य किया जा रहा है। साथ ही उसकी निगरानी भी की जा रही है। प्रशासन के सतत प्रयासों के चलते अब प्रभावितों की संख्या में निरंतर कमी आ रही है।, लेकिन फिर भी प्रशासन पूरी सतर्क है। नगर निगम का अमला लगातार क्षेत्र में सर्वे के साथ ही भागीरथपुरा क्षेत्र में रिंग सर्वे में जुटा है। लीकेज भी ढूंढे जा रहे है। कुछ लीकेज ठीक भी किये जा चुके है। साथ ही शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। पानी को क्लोरीनेशन किया जा रहा है, घर घर शुद्ध जल की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा रही है। पेयजल के लिए क्लोरिनेटेड वॉटर सप्लाई किया जा रहा है। जबकि अन्य उपयोग के लिए जिन बोरवेल के सेंपल लिए गए और उपयोग हेतु ठीक पाये गए,उसका उपयोग अन्य कामों में किया जा सकता है।
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई जलजनित घटना के पश्चात प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों के सहयोग से क्षेत्र के नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की लगातार समझाइश दी जा रही है। साथ ही रहवासियों के रिंग सर्वे एवं फॉलोअप सर्वे का कार्य भी किया जा रहा है। स्थिति का जायजा लेने के लिये कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हासानी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों से चर्चा कर उन्हें स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने को कहा गया है। जिसमें बताया जा रहा है कि प्रभावित क्षेत्र के नागरिक पानी को उबाल कर पीयें। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्साकीय परामर्श लें। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रविवार को भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्र में घर-घर जाकर ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियाँ वितरित कीं। साथ ही प्रत्येक घरों में पानी को शुद्ध करने हेतु क्लीनवेट की बोतल किट वितरित की गयी। नागरिकों को किट के उपयोग करने की जानकारी भी दी गयी।
2354 घरों का सर्वे, 9416 लोगों की जाँच तथा 429 पुराने मरिजों का फालोअप किया गयामुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.हासानी ने बताया कि कलेक्टर वर्मा के निर्देशन में रविवार को स्वास्थ्य विभाग ने एक मजबूत रणनीति को अपनाते हुए फील्ड में 17 टीम लगाई। इस टीम में जनअभियान परिषद के सदस्य, कम्युनिटी हेल्प ऑफिसर, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता,एएनएम,सुपरवाईजर एवं एनजीओ के सदस्य शामिल हैं। यह संयुक्त टीम नागरिकों को जलजनित बीमारी से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में जन-जागरूकता फैला रही है।
उन्होंने बताया कि टीम ने रविवार को भागीरथपुरा प्रभावित क्षेत्र के 2354 घरों का सर्वे किया। साथ ही 9416 लोगों के स्वास्थ्य की जाँच की। इसके अलावा 429 पुराने मरीजों का फालोअप किया गया। कुल 256 मरीजों का डिस्चार्ज किया गया। प्रभावितों के परिवहन हेतु पाँच एम्बुलेंस लगायी गयीं। विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कुल प्रभावितों की संख्या 398 है। क्षेत्र में रिंग सर्वे एवं फॉलोअप सर्वे लगातार चल रहा है, स्वास्थ्य विभाग द्वारा पानी को पूर्णतया सुरक्षित रखने के लिए क्लोरीवेट ड्रॉप वितरित किए जा रहे हैं। दल के सदस्य मरीज को दवाई का डोज पूरा लेने का आग्रह कर रहे हैं तथा धात्री माताओं को यह समझाईश दी जा रही है कि 06 माह तक के बच्चों को केवल और केवल मां का दूध ही पिलाएं।
भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी-दस्त से पीड़ित व्यक्ति जो अब स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं, उनसे यह अनुरोध किया गया है कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद वह निर्धारित डोज पूरा करें। हल्के और मध्यम लक्षणों से पीड़ित व्यक्तियों से भी अनुरोध किया गया है कि वह भी दवाओं का अपना डोज पूरा करे, बीच में डोज छोड़ने पर संक्रमण पुनः हो सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर