सूरत में सुबह 6 से 8 बजे तक पतंग उड़ाने पर प्रतिबंध, 5 जनवरी से लागू होगा यह नियम
सूरत, 04 जनवरी (हि.स.)। गुजरात की सूरत पुलिस ने 5 जनवरी से सुबह 6 से 8 बजे तक पतंग उड़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सूरत शहर पुलिस ने एक सार्वजनिक आदेश जारी कर 5 से 16 जनवरी तक पतंग उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। उत्तरायण पर्व की खुशियां कई बा
सूरत में सुबह 6 से 8 बजे तक पतंग उड़ाने पर रोक


सूरत, 04 जनवरी (हि.स.)। गुजरात की सूरत पुलिस ने 5 जनवरी से सुबह 6 से 8 बजे तक पतंग उड़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सूरत शहर पुलिस ने एक सार्वजनिक आदेश जारी कर 5 से 16 जनवरी तक पतंग उड़ाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है।

उत्तरायण पर्व की खुशियां कई बार इंसानों और बेजुबान पक्षियों के लिए खतरा बन जाती हैं। पतंग की डोर से गला कटने, दुर्घटनाओं और पक्षियों की मौत जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सूरत शहर पुलिस ने कड़ा कदम उठाया है। यह निर्णय लोगों की सुरक्षा और पशु-पक्षियों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सूरत पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत के जारी आदेश के अनुसार सार्वजनिक मार्गों पर पतंग उड़ाना, खतरनाक छतों से पतंगबाजी करना और कटे हुए पतंग या डोर को पकड़ने के लिए सड़क पर दौड़ना प्रतिबंधित रहेगा।

चाइनीज मांझा और तुक्कल पर सख्त रोक

पुलिस कमिश्नर के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नायलॉन, सिंथेटिक सामग्री, कांच के चूरे या लोहे के पाउडर से कोटेड चाइनीज मांझा के विक्रय, भंडारण और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले चाइनीज मांझा, प्लास्टिक डोर और ग्लास-कोटेड नायलॉन थ्रेड की खरीद-फरोख्त या आयात भी गैरकानूनी होगा। आकाश में उड़ाए जाने वाले चाइनीज स्काई लैंटर्न (तुक्कल) को खरीदना, बेचना या उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है, क्योंकि इससे आगजनी और हादसों का खतरा बना रहता है।

लाउडस्पीकर और आपत्तिजनक लिखावट पर भी रोक

पुलिस आदेश के अनुसार, लोगों को परेशान करने वाले तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर बजाने पर रोक रहेगी। साथ ही पतंगों पर किसी की भावना आहत करने वाले या उकसावे वाले शब्द लिखने की भी अनुमति नहीं होगी।

यह सार्वजनिक आदेश 5 जनवरी 2026 (सोमवार) से 16 जनवरी 2026 तक लागू रहेगा। इस अवधि में यदि कोई व्यक्ति आदेश का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से उत्तरायण पर्व मनाएं, ताकि किसी की जान न जाए और बेजुबान पक्षियों की रक्षा की जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे