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जम्मू,, 04 जनवरी (हि.स.)। कश्मीर वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें यात्रा को सिर्फ दूरी तय करने का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव का जरिया बनाया गया है। श्री माता वैष्णो देवी कटरा और श्रीनगर के बीच चलने वाली यह आधुनिक ट्रेन अपनी तेज रफ्तार के साथ-साथ अब अपनी खास मेहमाननवाजी और पारंपरिक स्वादों के कारण भी चर्चा में है।
इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत इसका विशेष रूप से तैयार किया गया भोजन है, जिसमें जम्मू क्षेत्र की डोगरा संस्कृति और कश्मीर घाटी के पारंपरिक जायकों का सुंदर संगम देखने को मिलता है। जब वंदे भारत एक्सप्रेस कटरा से श्रीनगर की ओर रवाना होती है, तो यात्रियों को डोगरी व्यंजनों का स्वाद चखने का अवसर मिलता है। इसमें राजमा, हॉक साग, कश्मीरी कदम, हॉक पनीर जैसे पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं, जो स्थानीय मसालों और पारंपरिक पाक शैली से तैयार किए जाते हैं।
वहीं, श्रीनगर से कटरा की वापसी यात्रा में यात्रियों के लिए कश्मीरी व्यंजनों की विशेष थाली परोसी जाती है। कश्मीरी पुलाव, जीरा आलू, हॉक पनीर, कश्मीरी कदम और केसर फिरनी जैसे व्यंजन कश्मीर की समृद्ध खान-पान परंपरा को दर्शाते हैं। केसर की खुशबू और खास कश्मीरी मसालों से बना यह भोजन यात्रियों को घाटी की मशहूर मेहमाननवाजी का अहसास कराता है।
रेलवे की यह पहल केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जम्मू और कश्मीर के दो अलग-अलग भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों को एक ही सफर में जोड़ने का संदेश देती है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को इस यात्रा के दौरान भारत की विविधता में एकता का अनुभव मिलता है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
कश्मीर वंदे भारत एक्सप्रेस आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक विरासत के बीच एक मजबूत सेतु बनकर उभरी है। यह ट्रेन साबित करती है कि यात्रा केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का साधन नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानने और सम्मान देने का एक सशक्त माध्यम भी हो सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता