जीत महतो मौत मामला में एसएसपी ने बताया सेरेब्रल मलेरिया से हुई मौत
पूर्वी सिंहभूम, 04 जनवरी (हि.स.)। एमजीएम पुलिस हिरासत में हुई जीत महतो की मौत को लेकर जहां सांसद विद्युत वरण महतो, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और विधायक सरयू राय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं इस मामले में अब
मृतक जीत महतो और एमजीएम थाना का फाइल फोटो


पूर्वी सिंहभूम, 04 जनवरी (हि.स.)।

एमजीएम पुलिस हिरासत में हुई जीत महतो की मौत को लेकर जहां सांसद विद्युत वरण महतो, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और विधायक सरयू राय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे।

वहीं इस मामले में अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पीयूष पांडेय के आधिकारिक बयान ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि जीत महतो की मृत्यु किसी भी प्रकार की पुलिस प्रताड़ना से नहीं, बल्कि कम्प्लिकेटेड सेरेब्रल मलेरिया के कारण हुई है।

एमजीएम थाना क्षेत्र के गोकुल नगर निवासी जीत महतो की मौत ने बीते दिनों जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी थी। विपक्षी दलों और जनप्रतिनिधियों ने इसे पुलिस हिरासत में मौत बताते हुए कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। इस बीच सांसद विद्युत वरण महतो, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और विधायक सरयू राय ने पुलिस को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने से मामला और भी गरमा गया था।

लेकिन अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पीयूष पांडेय के बयान के बाद घटनाक्रम ने अलग दिशा ले ली है। एसएसपी के अनुसार, जीत महतो पहले से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित था। उसकी हालत बिगड़ने पर 29 दिसंबर 2025 को उसे एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां निरंतर इलाज के बावजूद 31 दिसंबर 2025 को उसकी मौत हो गई।

रविवार को एसएसपी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पूरे मामले में पारदर्शिता बरतते हुए दंडाधिकारी की उपस्थिति में पोस्टमार्टम कराया गया और इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। मेडिकल रिपोर्ट और दंडाधिकारी की ओर से तैयार पंचनामा में साफ तौर पर उल्लेख है कि मृतक के शरीर पर किसी भी प्रकार की बाहरी चोट, मारपीट या प्रताड़ना के निशान नहीं पाए गए हैं। चिकित्सकों ने इलाज के दौरान मिले लक्षणों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत का कारण कम्प्लिकेटेड सेरेब्रल मलेरिया बताया है।

हालांकि, प्रशासन ने किसी भी तरह की शंका को खत्म करने के लिए एक और कदम उठाया है। जानकारी के अनुसार, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष न्यायिक जांच कराए जाने को लेकर अनुरोध पत्र समर्पित किया गया है। अनुरोध स्वीकार होने के बाद इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाएगी, ताकि सच्चाई पर से हर तरह का संदेह पूरी तरह दूर हो सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक