प्रेमानंद महाराज की शरण में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेटर दीप्ति शर्मा
खेल के कौशल के साथ-साथ भगवान का चिंतन भी आवश्यक है : प्रेमानंद महाराज मथुरा, 04 जनवरी (हि.स.)। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी दीप्ति शर्मा ने वृंदावन पहुंचकर प्रख्यात संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस म
कैप्शनः प्रेमानंद महाराज का अध्यात्मक प्रवचन सुनतीं भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी दीप्ति शर्मा


खेल के कौशल के साथ-साथ भगवान का चिंतन भी आवश्यक है : प्रेमानंद महाराज

मथुरा, 04 जनवरी (हि.स.)। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी दीप्ति शर्मा ने वृंदावन पहुंचकर प्रख्यात संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मुलाकात के दौरान महाराज ने खेलों के महत्व और खिलाड़ी के जीवन में अभ्यास की भूमिका पर गहराई से चर्चा की।

इस मुलाकात के दौरान दीप्ति शर्मा भक्ति भाव में डूबी नजर आईं और उन्होंने महाराज जी की बातों को एकाग्रता से सुना। सोशल मीडिया पर इस मुलाकात का वीडियो रविवार तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक वैश्विक खिलाड़ी और एक आध्यात्मिक संत के बीच का यह संवाद युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है।

गौरतलब हो कि जब प्रेमानंद महाराज जी के शिष्य नवल नागरी ने दीप्ति शर्मा का परिचय कराते हुए बताया कि भारत ने विश्व चैंपियनशिप जीती है, तो महाराज जी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्र के लिए गौरव का क्षण बताया। महाराज जी ने कहा, ’कहने को तो यह मात्र एक खेल है, लेकिन एक खिलाड़ी की जीत से पूरे भारत को सुख मिलता है।’

उन्होंने आगे कहा कि जब भारतीय खिलाड़ी जीतता है, तो पूरा देश गौरवान्वित महसूस करता है। दूसरों को प्रसन्नता देना भी एक प्रकार का बड़ा परोपकार है। दीप्ति शर्मा को सफलता का मंत्र देते हुए प्रेमानंद महाराज ने ’अभ्यास’ की निरंतरता पर जोर दिया। उन्होंने सचेत करते हुए कहा कि अक्सर खिलाड़ी जीत मिलने के बाद अभ्यास में ढिलाई बरतने लगते हैं और मनोरंजन में समय व्यतीत करने लगते हैं, जिससे उनकी उन्नति रुक जाती है। उन्होंने उपदेश दिया कि “जीतने के बाद और अधिक सावधान हो जाना चाहिए। नित्य अभ्यास और दृढ़ता ही वह मार्ग है, जिससे खिलाड़ी लगातार आगे बढ़ सकता है“। महाराज जी ने खिलाड़ी को सलाह दी कि खेल के कौशल के साथ-साथ भगवान का चिंतन भी आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभ्यास ही वह एकमात्र साधन है जिसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति प्रवीण बन सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश कुमार