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यमुनानगर, 04 जनवरी (हि.स.)। यमुनानगर शहर की सड़कों पर बढ़ते ई-रिक्शा संचालन ने यातायात व्यवस्था को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ा दिया है। वाहन चालकों और आम नागरिकों का कहना है कि ई-रिक्शा अचानक रुक जाते हैं, कई बार बिना किसी चेतावनी के, जिससे पीछे से आने वाले वाहनों को इमरजेंसी ब्रेक लगाना पड़ता है। पिछले दो वर्षों में शहर में ऑटो रिक्शा की संख्या कम होने लगी है और उनकी जगह ई-रिक्शा ने ले ली है। शहर में अब ई-रिक्शा चालकों की संख्या ऑटो रिक्शा से अधिक हो गई है। इनमें बहुत से किशोर 15-16 वर्ष के और बुजुर्ग 80-85 वर्ष तक शामिल हैं।
लगभग आधे ई-रिक्शा चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है। इसके साथ ही, अधिकांश को यातायात नियमों की जानकारी या अनुभव नहीं है, जिससे सड़क सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। नागरिक आशीष, रवि और संजीव ने बताया कि शहर में ई-रिक्शा के लिए कोई निश्चित स्टैंड नहीं है और चालक सड़क किनारे नहीं खड़े रहते। कई प्रमुख मार्गों पर एक लेन पूरी तरह से ई-रिक्शा चालकों के कब्जे में है।
जिला नागरिक अस्पताल के बाहर अक्सर 10-15 ई-रिक्शा खड़े रहते हैं, जिससे मरीजों और आने-जाने वाले लोगों को परेशानी होती है। संदीप कुमार ने कहा कि दो सवारियों के लिए बनाए गए ई-रिक्शा में छह-से-सात लोग बैठाए जाते हैं। ओवरलोडिंग और अचानक ब्रेक लगाना आम है, जिससे पीछे से आने वाले वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है। शहरवासियों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस नियम तोड़ने वाले ई-रिक्शा चालकों पर कार्रवाई नहीं करती, जिससे उनकी हिम्मत बढ़ गई है। यातायात थाना प्रभारी कुशलपाल राणा ने रविवार को बताया कि ई-रिक्शा यूनियन के नेताओं को बुलाकर चालकों को नियम पालन के लिए समझाया जाएगा। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और चालान काटे जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार