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बांसवाड़ा, 04 जनवरी (हि.स.)। हिन्दी फिल्म 'चलती का नाम गाड़ी' का वह मशहूर गाना जाना था जापान, पहुंच गए चीन, समझ गए ना... बांसवाड़ा में उस वक्त चरितार्थ होता नजर आया, जब बिहार जाने वाले यात्रियों का एक जत्था धोखे का शिकार होकर राजस्थान के बांसवाड़ा पहुंच गया। जयपुर के एक निजी बस संचालक ने चंद रुपयों के लालच में मानवता को ताक पर रखते हुए बिहार के आठ यात्रियों को बनारस (वाराणसी) पहुंचाने के बजाय बांसवाड़ा लाकर छोड़ दिया।
बिहार राज्य के रहने वाले आठ लोग जयपुर से बनारस जाना चाहते थे। उन्होंने जयपुर के एक ट्रैवल एजेंसी से संपर्क किया। बस संचालक ने उनसे बनारस का किराया तो ले लिया, लेकिन उन्हें उस बस में बैठाने के बजाय बांसवाड़ा आने वाली बस में बैठा दिया। पीड़ित यात्रियों का कहना है कि सफर के दौरान जब उन्हें आभास हुआ कि बस गलत दिशा में जा रही है, तो उन्होंने बस चालक और स्टाफ के सामने अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई। लेकिन, बस स्टाफ ने उनकी एक न सुनी और गुमराह करते हुए उन्हें बांसवाड़ा लाकर छोड़ दिया।
बांसवाड़ा पहुंचने पर इन यात्रियों के होश उड़ गए। उनका कहना है कि सफर के किराए में ही उनके पास मौजूद पैसे खर्च हो चुके हैं और अब उनकी जेब पूरी तरह खाली है। अनजान शहर और हाथ में पैसे न होने के कारण वे दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं। धोखाधड़ी का शिकार हुए ये आठों यात्री अपनी फरियाद लेकर बांसवाड़ा कोतवाली थाने पहुंचे। वहां उन्होंने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई और बस संचालक की मनमानी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल, ये लोग पुलिस और प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें किसी भी तरह सुरक्षित बनारस तक पहुंचाया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुभाष