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पूर्वी सिंहभूम, 04 जनवरी (हि.स.)।
डहरे टुसू परब का आयोजन रविवार को किया गया।
कार्यक्रम के दौरान लोगों ने जनभागीदारी, सांस्कृतिक चेतना और अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में हजारों लोगों की सहभागिता के साथ यह आयोजन लगातार चौथे वर्ष पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और पारंपरिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। डहरे क्षेत्र की धरती पर टुसू परब केवल उत्सव नहीं, बल्कि लोक संस्कृति और सामूहिक संकल्प की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर उभरा।
मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। खराब मौसम के कारण सांस्कृतिक यात्रा डिमना चौक से शुरू होकर साकची स्थित आमबागान मैदान पहुंची। पूरे मार्ग में ढोल, नगाड़ा और मांदर की गूंजती थापों पर नाचते-गाते लोगों ने यह संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, संस्कृति का संकल्प अडिग रहता है। हरे और पीले रंग की छटा, पारंपरिक वेशभूषा और गूंजते टुसू गीतों ने पूरे शहर को लोक रंग में रंग दिया।
इस आयोजन में महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। पारंपरिक परिधान में सजी महिलाओं ने गीत और नृत्य के माध्यम से लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने की अपनी निर्णायक भूमिका को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया। यात्रा मार्ग में डिमना, संकोसाई, मानगो, पुराना कोर्ट और आमबागान क्षेत्रों में स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने पानी, चाय, खिचड़ी और मूढ़ी-घुगनी की व्यवस्था की गई, जो सामाजिक एकता और सेवा-भावना का उदाहरण बनी।
आयोजन से जुड़े दीपक रंजीत ने कहा कि डहरे टुसू परब हमारी सांस्कृतिक पहचान और निरंतरता का प्रतीक है, जिसे कोई भी बाधा कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और सभी संबंधित विभागों के सहयोग के लिए आभार जताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक