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बलरामपुर, 04 जनवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत करने के उद्देश्य से बनाई जा रही सड़कों की गुणवत्ता को लेकर बलरामपुर रामानुजगंज जिले के कुसमी विकासखंड में विवाद गहराता नजर आ रहा है। धनेशपुर से आश्रित ग्राम छुराकोना तक निर्माणाधीन सड़क की सतह झाड़ू लगाने भर से उखड़ने के आरोपों के बाद अब जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आया है।
करीब 3 किलोमीटर लंबी इस डामर एवं सीसी सड़क का निर्माण लगभग 1 करोड़ 91 लाख 25 हजार रुपये की लागत से किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए थे। ग्रामीणों का कहना था कि सड़क की ऊपरी परत बेहद कमजोर है और मामूली रगड़ से ही गिट्टी बाहर निकल रही है, जिससे आने वाले मानसून में सड़क के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की आशंका है।
मामले को तूल पकड़ता देख प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता जी एस सिदार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए आज रविवार काे विज्ञप्ति जारी कर बताया कि धनेशपुर से छुराकोना सड़क की गुणवत्ता की जांच अधीक्षण अभियंता, कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उप अभियंता एवं संबंधित ठेकेदार की मौजूदगी में की गई है। जांच के दौरान सड़क निर्माण में उपयोग की गई जीएसबी, डब्ल्यूबीएम एवं एमएसएस परतों का परीक्षण किया गया, जो मानकों के अनुरूप पाई गईं।
उन्होंने बताया कि इसी मार्ग के आगे पीएम जनमन फेज दो के अंतर्गत धनेशपुर से बैगीनपाठ सड़क का निर्माण एक अन्य ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा है। इस निर्माण कार्य के लिए भारी वाहनों के माध्यम से सामग्री का परिवहन धनेशपुर से छुराकोना सड़क के जरिए किया जा रहा था। सड़क की स्वीकृत भार क्षमता से अधिक वजन वाले वाहनों के आवागमन के कारण कुछ स्थानों पर डामरीकरण की ऊपरी सतह से दाने निकलने की स्थिति उत्पन्न हुई थी।
कार्यपालन अभियंता ने बताया कि इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ठेकेदार को तत्काल सुधार कार्य के निर्देश दिए गए थे। निर्देशानुसार प्रभावित स्थलों पर सुधार कार्य कर लिया गया है। साथ ही निर्माणाधीन सड़क पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि सड़क की गुणवत्ता पूरी तरह मानक अनुरूप बनी रहे और भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो।
विभाग का दावा है कि सड़क निर्माण कार्य तय समयसीमा में पूर्ण किया जाएगा और गुणवत्ता को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि ग्रामीण अब भी निर्माण कार्य पर सतत निगरानी और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि करोड़ों की लागत से बनी सड़क लंबे समय तक टिकाऊ साबित हो सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय