अभाविप का 61वां अधिवेशन: बांसवाड़ा में निकली भव्य शोभायात्रा
बांसवाड़ा, 04 जनवरी (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) चित्तौड़ प्रांत के 61वें प्रांत अधिवेशन के दूसरे दिन बांसवाड़ा शहर विद्यार्थी शक्ति के अभूतपूर्व उत्साह और अनुशासन का साक्षी बना। अधिवेशन के अंतर्गत नगर में एक भव्य शोभायात्रा निकाल
शोभायात्रा का स्वागत करते लोग


अधिवेशन में उपस्थिति पदाधिकारी


बांसवाड़ा, 04 जनवरी (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) चित्तौड़ प्रांत के 61वें प्रांत अधिवेशन के दूसरे दिन बांसवाड़ा शहर विद्यार्थी शक्ति के अभूतपूर्व उत्साह और अनुशासन का साक्षी बना। अधिवेशन के अंतर्गत नगर में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसके संपन्न होने पर एक विशाल खुले अधिवेशन का आयोजन किया गया।

शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी अभाविप की शोभायात्रा में चित्तौड़ प्रांत के विभिन्न जिलों से आए हजारों छात्र-छात्राओं ने कदमताल करते हुए सहभागिता की। यह शोभायात्रा न केवल अनुशासित थी, बल्कि बेहद गरिमामयी भी रही। मार्ग में जगह-जगह सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संगठनों ने पुष्पवर्षा कर युवा तरूणाई का आत्मीय स्वागत किया। भारत माता के जयकारों और राष्ट्रभक्ति के गगनभेदी उद्घोषों से पूरा शहर गुंजायमान हो उठा।

शोभायात्रा के समापन के बाद मुख्य आयोजन स्थल पर एक विशाल खुले अधिवेशन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, शिक्षाविद् और समाज के प्रबुद्धजन शामिल हुए। इस अवसर पर प्रांत मंत्री जितेन्द्र लोधा ने अपने संबोधन में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्र समस्याओं को लेकर परिषद के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि अभाविप शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सदैव संघर्षरत रहेगी। वहीं, राष्ट्रीय मंत्री हर्षित नानोमा ने युवाओं को राष्ट्र की धुरी बताते हुए कहा कि आज की विद्यार्थी शक्ति ही कल के भारत की दिशा तय करेगी। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

अधिवेशन के दौरान अलग-अलग सत्रों में अन्य वक्ताओं ने भी महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। जनजाति उत्थान पर बोलते हुए आनंद निनामा ने जनजाति समाज के शैक्षणिक और आर्थिक विकास पर जोर दिया और कहा कि शिक्षा ही सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम है। दूसरी ओर, पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने राजस्थान में लंबे समय से बंद पड़े छात्रसंघ चुनावों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने छात्रसंघ चुनावों को लोकतंत्र की पाठशाला बताते हुए इनके शीघ्र आयोजन की मांग की। महिला सशक्तिकरण के विषय पर दीपा जाट ने खेल जगत में भारत की बेटियों की बढ़ती उपलब्धियों पर अपने विचार रखे, जबकि दीप्ति मेवाड़ा ने राष्ट्र निर्माण में नारी शक्ति के त्याग और बलिदान को रेखांकित करते हुए अपना उद्बोधन दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुभाष