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पंतनगर, 03 जनवरी (हि.स.)। नवंबर, दिसंबर में बारिश नहीं होने से लगभग सभी फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा। ऐसे में फोटो सिंथेसिस की कमी से पौधों की बढ़वार तो रूकेगी व फसलों में बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ेगा।
जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि एवं मौसम विशेषज्ञ डाॅ. अजित सिंह नैन के मुताबिक बारिश नहीं होने से पर्यावरण सहित फसलों पर कई प्रभाव पड़ते हैं। पत्तियों पर धूल जमने से पौधों के स्टोमेटा अपना फंक्शन ढंग से नहीं कर पातें। बारिश से धूल साफ होने से पौधे फोटोसिंथेसिस क्रिया ढंग से कर पाते हैं और काॅर्बन डाई आक्साइड का एक्सचेंज भी अच्छा होता है। बारिश न होने से पौधों में नाइट्रोजन की कमी से खेत में अतिरिक्त नाइट्रोजन डालनी पड़ती है। बारिश नहीं होने से सिंचाई का खर्च बढ़ने सहित ऊर्जा और इकोलाॅजी का भी ह्रास होता है। पंपसेट आदि चलने से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भी बढ़ता है।
बारिश न होने और क्लाउड कवर रहने से पौधे अंडर स्ट्रस रहते हैं। जिससे उनमें बीमारी की संभावना बहुत बढ़ जाती है। वहीं बारिश में बीमारियों के कीटाणु धुल जाते हैं। जिससे पौधों में बीमारी का प्रकोप बहुत कम हो जाता है।
फसलों को बचाने का उपाय: डाॅ. नैन के अनुसार ऐसी में फसलों के बचाव के तहत सिंचाई के लिए फ्लड इरिगेट के बजाय स्प्रिंकल अथवा रेन गन का प्रयोग किया जाए। इस तकनीक में पत्तियां धुल जाती हैं, पानी भी कम लगता है।
अभी पांच दिन बारिश नहीं: उन्होंने बताया कि अभी अगले पांच दिन बारिश की कोई संभावना नहीं है। जबकि घने कोहरे के बीच ठंड बनी रहेगी। हवा के 4-6 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की उम्मीद है। कुछ जगहों पर घने कोहरे और ठंड के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / डी तिवारी