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तिरुवन्नामलाई, 03 जनवरी (हि.स.)। मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा के पावन अवसर पर तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई में आस्था का अद्भुत दृष्य देखने को मिला। पंचभूत स्थलों में से एक अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करने वाले इस पवित्र स्थल पर हजारों श्रद्धालुओं ने प्रातःकाल से ही अन्नामलाईयर पर्वत (अरुणाचल पर्वत) के चारों ओर परिक्रमा कर भगवान शिव की आराधना की।
तिरुवन्नामलाई स्थित प्रसिद्ध अरुणाचलेश्वर मंदिर और उसके पीछे स्थित अन्नामलाई पर्वत को स्वयं शिव स्वरूप मानकर प्रतिदिन हजारों भक्त पूजा-अर्चना करते हैं। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन इस आस्था का स्वरूप और भी विराट हो जाता है। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने करीब 14 किलोमीटर लंबे वृत्ताकार मार्ग पर पदयात्रा कर गिरिवलय (पर्वत परिक्रमा) की।
देश के कई राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु
मंदिर प्रशासन बोर्ड के अनुसार, मार्गशीर्ष पूर्णिमा शुक्रवार शाम 06:45 बजे प्रारंभ होकर आज (शनिवार) शाम 04:43 बजे तक रहेगी। इस विशेष अवसर पर केवल तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना समेत देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों भक्त तिरुवन्नामलाई पहुंचे। कल सुबह से ही शहर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी।
आठ लिंगों के दर्शन और मंत्रोच्चार
गिरिवलय मार्ग पर स्थित तिरुनेर अन्नामलैयार, आदि अरुणाचलेश्वरर मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में भक्तों ने अग्निलिंगम, एमलिंगम, वायुलिंगम, निरुतिलिंगम, वरुणलिंगम, कुबेरलिंगम सहित कुल आठ लिंगों के दर्शन किए। पूर्णिमा की चांदनी में ‘ ऊँ नमः शिवाय’ मंत्र के जाप से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कड़ाके की ठंड में भी जारी रही रात्रि भर परिक्रमा
रातभर तेज ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। हजारों भक्तों ने मार्गशीर्ष पूर्णिमा की रात गिरिवलय करते हुए पूरी रात पदयात्रा जारी रखी। जगह-जगह भजन, मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी से तिरुवन्नामलाई शिवमय हो उठा।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर आयोजित यह गिरिवलय (परिक्रमा) न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुभूति का भी विशेष अवसर माना जाता है।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV