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धमतरी, 03 जनवरी (हि.स.)।छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िले की ग्राम पंचायत कलारतराई में महानदी के प्राकृतिक तटबंध से पखवाड़े भर से चल रहे अवैध मुरूम उत्खनन पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई अब सवालों के घेरे में है। प्रशासन और खनिज विभाग ने कुछ दिनों पूर्व रात मौके पर पहुंचकर एक भारी वाहन जब्त कर कार्रवाई की, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई नाममात्र और खानापूर्ति से अधिक कुछ नहीं है।
ग्रामीणों ने शिकायत कर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया गया था। इसके बाद की गई कार्रवाई से ग्रामीणों में संतोष नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार प्रतिदिन रात के समय दो बड़ी खुदाई मशीनों और पांच से छह भारी वाहनों के माध्यम से लगातार मुरूम निकाला जा रहा है, लेकिन कार्रवाई केवल एक वाहन पर ही की गई। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी सड़क निर्माण कंपनी पर एक वाहन की जब्ती से न तो कोई असर पड़ेगा और न ही अवैध खनन पर रोक लगेगी। उनका आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कुछ समय के लिए उत्खनन बंद किया गया, लेकिन अधिकारियों के लौटते ही दोबारा मुरूम निकालने का काम शुरू कर दिया गया।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि सड़क निर्माण कंपनी मुरूम निकालकर चली जाएगी, लेकिन प्राकृतिक तटबंध को हुए नुकसान का दुष्परिणाम ग्राम कलारतराई सहित आसपास के गांवों को भविष्य में भुगतना पड़ेगा। इससे बाढ़, भू-क्षरण और भूजल स्तर गिरने जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो किसी बड़ी आपदा से कम नहीं होंगी। मालूम हो कि पूर्व में इस अवैध उत्खनन में पंचायत प्रतिनिधियों और सड़क निर्माण कंपनी की संलिप्तता देखी गई थी।
पुना राम साहू , अनिल साहू , कुंदन साहू , शिवकुलेशर साहू सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस अवैध उत्खनन पर पूरी तरह रोक लगाई जाए, खुदाई से बनाए गए कृत्रिम गड्ढों को समतल किया जाए तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक निकाली गई मुरूम की राशि की वसूली की जाए।
प्राकृतिक तटबंध पर उत्खनन पर सख्त प्रतिबंध
प्राकृतिक तटबंधों से जुड़े मामलों में भारतीय हरित न्यायाधिकरण के स्पष्ट नियम हैं। नियमों के अनुसार किसी भी नदी के प्राकृतिक तटबंध पर भारी मशीनों से खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। नदी की प्राकृतिक धारा, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन की रक्षा के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।
नियमों के उल्लंघन पर प्रति हेक्टेयर तक भारी आर्थिक दंड, पांच वर्ष तक का कारावास, खनन पट्टा निरस्त करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का प्रावधान है। सर्वोच्च न्यायालय और सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत इसे गंभीर अपराध माना गया है, क्योंकि इससे नदी का पारिस्थितिकी तंत्र, भूजल स्तर और आसपास के गांवों की सुरक्षा पर गहरा खतरा उत्पन्न होता है।
पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए ऐसे मामलों में सख्त और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई है। इस संबंध में खनिज अधिकारी हेमंत चेरपा ने कहा कि रेत या मुरूम से संबंधित किसी में मामले में बयान देने मै अधिकृत नहीं हूं। कलेक्टर ही इस संबंध में बता पाएंगे। कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा संबंधित स्थल की जांच कर उचित कार्रवाई का निर्देश देंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा