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कोलकाता, 03 जनवरी (हि.स.)। भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों के सदस्यों को बड़ी राहत देते हुए बिना किसी दस्तावेज के मतदाता सूची में नाम दर्ज करने की अनुमति दे दी है। इस निर्देश के तहत बिरहोर, टोटो, लोढा सबर और खेरिया सबर समुदायों के पात्र सदस्यों को जिला मजिस्ट्रेट की स्वीकृति के आधार पर मतदाता के रूप में पंजीकृत किया जाएगा, भले ही उनका नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज न रहा हो।
निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने प्रखंड विकास अधिकारियों से प्रखंडवार नामों और बस्तियों की सूची तलब की है। साथ ही जिन सदस्यों के पास अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र नहीं हैं, उन्हें प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया भी प्रशासन की ओर से पूरी की जाएगी।
एक वरिष्ठ जिला चुनाव अधिकारी के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट की मंजूरी मिलने के बाद बिरहोर, टोटो और सबर समुदाय के मतदाताओं का नाम बिना दस्तावेज के दर्ज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पुरुलिया जिले में खेरिया सबर समुदाय के अधिकांश लोगों के पास आधार कार्ड उपलब्ध है। वहीं बिरहोर और सबर समुदाय के जिन सदस्यों के पास जाति प्रमाण पत्र नहीं हैं, उनके लिए प्रशासन यह प्रक्रिया पूरी करेगा।
अलीपुरद्वार जिले में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि निर्वाचन आयोग का निर्देश मिल चुका है और फिलहाल दस्तावेजों की कमी से जुड़े मामले सामने नहीं आए हैं, फिर भी स्थिति की समीक्षा की जा रही है।
संशोधित मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी। बिरहोर और टोटो समुदाय केंद्र सरकार की पीवीटीजी श्रेणी में आते हैं और इन्हें संकटग्रस्त माना जाता है। बिरहोर समुदाय मुख्य रूप से पुरुलिया जिले के बलरामपुर, बाघमुंडी और झालदा-1 प्रखंडों में रहता है, जिनकी अनुमानित आबादी करीब 300 है। 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार, 18 वर्ष से अधिक आयु के 181 बिरहोर मतदाता थे और प्रशासन के विशेष अभियान के बाद सभी का नाम सूची में दर्ज किया गया था।
टोटो जनजाति मुख्य रूप से अलीपुरद्वार जिले के मदारीहाट प्रखंड के टोटोपाड़ा गांव में, भूटान सीमा के पास निवास करती है। उनकी अनुमानित आबादी करीब 1700 है। लोढा सबर और खेरिया सबर समुदायों की आबादी में भी गिरावट देखी जा रही है। लोढा सबर झाड़ग्राम के सात प्रखंडों, पश्चिम मेदिनीपुर के 14 प्रखंडों और पूर्व मेदिनीपुर के 1 प्रखंड में फैले हुए हैं, जिनकी आबादी एक लाख से अधिक बताई जाती है। खेरिया सबर केवल पुरुलिया जिले के 11 प्रखंडों में पाए जाते हैं, जहां उनके 3127 परिवार हैं और कुल आबादी करीब 14040 है, जिनमें 6950 मतदाता शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल खेरिया सबर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रमुख प्रशांत रक्षित ने निर्वाचन आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यदि इन आदिवासी समुदायों से दस्तावेजों के जरिए अपनी जड़ें साबित करने को कहा जाए तो यह बेहद शर्मनाक होगा। उन्होंने कहा कि आयोग के इस निर्णय से समुदाय संतुष्ट है।
उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश काल में 1871 के आपराधिक जनजाति अधिनियम के तहत सबर समुदाय को जन्म से अपराधी करार दिया गया था, जिसे 1952 में निरस्त कर दिया गया। दशकों की उपेक्षा के बावजूद आज भी कई परिवार जंगल और पहाड़ी इलाकों में पारंपरिक जीवनशैली के साथ रह रहे हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग ने यह महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर