पुलिस हिरासत में युवक की मौत
पूर्वी सिंहभूम, 03 जनवरी (हि.स.)।एमजीएम थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत में युवक की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सांसद बिद्युत बरण महतो ने इसे पुलिस प्रताड़ना से हुई हत्या बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की मांग
पीड़ित परिवार से मुलाकात करते सांसद


पूर्वी सिंहभूम, 03 जनवरी (हि.स.)।एमजीएम थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत में युवक की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सांसद बिद्युत बरण महतो ने इसे पुलिस प्रताड़ना से हुई हत्या बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

एमजीएम थाना क्षेत्र के गोकुल नगर निवासी जीत महतो की पुलिस हिरासत में हुई मौत को लेकर सनसनीखेज आरोप सामने आए हैं। पीड़ित परिवार ने दावा किया है कि मामले को दबाने के लिए थाना प्रभारी की ओर से दो लाख रुपये दिए गए। इस घटना को लेकर जमशेदपुर के सांसद बिद्युत बरण महतो ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह स्वाभाविक मृत्यु नहीं, बल्कि पुलिस प्रताड़ना के कारण हिरासत में की गई हत्या है।

घटना की जानकारी मिलते ही सांसद बिद्युत बरण महतो शुक्रवार देर रात गोकुल नगर पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान मृतक की मां पूजा महतो ने गिरफ्तारी से लेकर मौत तक की पूरी घटना का जो विवरण दिया, उसे सांसद ने बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला बताया। सांसद ने कहा कि जीत महतो की गिरफ्तारी की प्रक्रिया ही कई गंभीर सवाल खड़े करती है।

सांसद ने यह भी कहा कि युवक की मौत के बाद जिस तेजी से पोस्टमार्टम कराया गया और तुरंत अंतिम संस्कार कर दिया गया, वह भी संदेह के घेरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि मात्र एक छोटे मोबाइल की चोरी के संदेह में पुलिस ने जीत महतो को जबरन हिरासत में लिया, जहां पुलिस प्रताड़ना के कारण उसकी हालत बिगड़ गई और बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद मामले को सामान्य दिखाने के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

दो लाख रुपये दिए जाने के आरोप पर सांसद ने सवाल उठाया कि यह राशि किस मद से दी गई, किस अधिकारी की अनुमति से दी गई और क्या झारखंड में एक युवा की जान की कीमत सिर्फ दो लाख रुपये है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर जांच का विषय है।

सांसद बिद्युत बरण महतो ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक से मांग की कि इस मामले में जिम्मेदार सभी पुलिस पदाधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित थाना प्रभारी का पूर्व इतिहास भी विवादों से जुड़ा रहा है।

सांसद ने राज्य सरकार से मांग की कि मृतक अपने परिवार का एकमात्र सहारा था, इसलिए उसके परिवार और नवजात शिशु के भरण-पोषण के लिए समुचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि प्रशासन की ओर से जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।

परिजनों से मुलाकात के दौरान विनोद राय, रविंद्र सिंह शिशोदिया, सुशील पांडे, अनिमेष सिंहा, मुन्ना मिश्रा, राकेश प्रसाद, महेश सिंह, सुमन श्रीवास्तव और नवनीत तिवारी मौजूद थे।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक