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नई दिल्ली, 03 जनवरी (हि.स.)। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को वीबी- जी राम जी अधिनियम को वापस लिये जाने, मनरेगा को अधिकार-आधारित कानून के रूप में फिर से लागू करने और काम के अधिकार तथा पंचायतों की स्वायत्तता को पुनर्स्थापित किये जाने की मांग की।
खरगे ने आज पार्टी के 45 दिन के मनरेगा बचाओ संग्राम कार्यक्रम लांच होने के बाद केंद्र सरकार के समक्ष ये तीन मांगे रखीं। खरगे ने एक्स पोस्ट में कहा कि मनरेगा कोई दान नहीं बल्कि कानूनी गारंटी है। इस योजना ने करोड़ों गरीबों को उनके गांवों में काम दिया, भूख और मजबूरी में पलायन को कम किया, ग्रामीण मजदूरी बढ़ाई और महिलाओं की आर्थिक गरिमा को मजबूत किया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वीबी- जी राम जी कानून इस अधिकार को खत्म करने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत अब काम गारंटीड अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि केवल चुनी हुई पंचायतों में अनुमति के आधार पर मिलेगा। बजट की सीमा तय कर दी गई है, जिससे संकट के समय भी फंड खत्म होते ही काम बंद हो जाएगा। कानून में 60 दिन का वर्क ब्लैकआउट प्रावधान है, जो ग्रामीण इलाकों में सबसे कठिन समय में काम से इनकार को वैध बना देगा। मजदूरी भी अब निश्चित अधिकार नहीं रहेगी, बल्कि केंद्र द्वारा तय की गई दरों पर निर्भर करेगी।
उन्होंने कहा कि राज्यों को 40 प्रतिशत फंड देना होगा, जिससे संघीय ढांचा कमजोर होगा और गरीब राज्यों को नुकसान होगा। तकनीकी बाधाओं जैसे बायोमेट्रिक और ऐप आधारित प्रक्रियाओं से मजदूरों को बाहर कर दिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर