यूनानी अर्थशास्त्री ने दुनिया को सुनाई भारत की अनूठी विकास गाथा
- डॉ. मयंक चतुर्वेदी
इक्कीसवीं सदी की वैश्विक राजनीति सैन्य ताकत, खुले टकराव या वैचारिक ध्रुवीकरण तक सीमित नहीं रह गई है। यह सदी उन देशों की भी है, जिनके लिए युद्ध, धमकी और विचारधारात्मक वर्चस्व कोई मायने नहीं रखता है, ये तो अपनी उपयोगिता, विश्व
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