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जयपुर, 19 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने जेडीसी की मौजूदगी में जेडीए की कार्य प्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जेडीए में 90 फीसदी लोग ठेके और प्रतिनियुक्ति पर लगे हुए हैं। अधिकारी आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन जेडीए में कोई प्रभावी काम नहीं हो रहा है। कई कर्मचारियों पर कार्रवाई के मामले चल रहे हैं, लेकिन उनमें भी कुछ नहीं हो रहा। जेडीए में कई रिटायर कर्मचारी भी काम कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि शहर में अतिक्रमण हो रहे हैं और लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही है। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड रहा है। इसके साथ ही अदालत ने जेडीसी को पांच फरवरी को पेश होने के आदेश दिए हैं। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश द्रव्यवती नदी के विकास सहित अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान जेडीसी अदालत में हाजिर हुए। अरविन्द्र मिश्रा की ओर से दायर एक जनहित याचिका में बहस करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल मेहता ने कहा कि जेडीए ने डवलपमेंट के लिए विकास शुल्क लिया, लेकिन मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही। ऐसे में अदालत ने जेडीसी को कहा कि आमजन इस तरह के मुद्दों से परेशान है। इस पर जेडीसी ने कहा कि उन्होंने हाल ही में जेडीए आयुक्त का कार्य संभाला है। वे इन मुद्दों पर गंभीरता से काम करेंगे। इस पर अदालत ने उन्हें पांच फरवरी को पेश होने के आदेश दिए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक