हिंदू होने का मर्म है विविधता में एकता और आत्मभूतेषु भाव
-डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भारत एक देश होने के साथ ही एक चेतना है, एक संस्कार है, एक जीवन दृष्टि है। यह वह भूमि है जहां हजारों वर्षों से मानवता को जीने की कला सिखाई गई, जहां विविधता को शक्ति के रूप में देखा गया और जहां अंत:चेतना को ही एकता के लिए समाज की
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