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जम्मू,, 11 जनवरी (हि.स.)।
सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना के तहत वर्षों से काम कर रही रसोई सहायिकाएं मात्र 30 प्रतिदिन की बेहद कम मजदूरी पर काम करने को मजबूर हैं। महंगाई के इस दौर में इतनी कम आय में परिवार का गुजारा करना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। महिलाओं का कहना है कि वे कई सालों से ईमानदारी से बच्चों के लिए खाना बना रही हैं, लेकिन न तो उन्हें सम्मानजनक वेतन मिल रहा है और न ही कोई स्थायी सुविधा।
रसोई सहायिकाओं ने सरकार से मांग की है कि उनकी मेहनत को देखते हुए मानदेय में बढ़ोतरी की जाए और उन्हें सामाजिक सुरक्षा व अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएं। उनका सवाल है कि जब वे शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं तो क्या उन्हें इंसाफ नहीं मिलना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता