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ऋषिकेश, 11 जनवरी (हि.स.)।ब्राह्मण किसी जाति का नाम नहीं, बल्कि करुणा से उपजा वह विचार है, जिसकी दृष्टि आकाश जितनी व्यापक और हृदय सागर जितना उदार होता है। समाज को एक सूत्र में पिरोने की क्षमता ही ब्राह्मणत्व की आत्मा है। आज आवश्यकता है कि सभी सनातनियों को साथ लेकर चलने की इस विचारधारा को पुनः जीवंत किया जाए।
यह उद्गार जूना पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने विप्र फाउंडेशन द्वारा आयोजित आरोहण – नायक प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन विशेष सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि ईश्वर की प्रथम कृति सृजन और रचना है, और उसका प्रतीक ब्राह्मण है। ब्राह्मण ‘ब्रह्म’ है—जो ब्रह्मा की भांति समभाव से सबको देखता है।
इसी कारण उसमें समस्त सनातनियों को साथ लेकर चलने की सामर्थ्य निहित है। स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज ने ब्राह्मण को ‘अजातसूत्र’ बताते हुए कहा कि जहां न अहंकार हो और न जातिगत भेद, वही सच्चा ब्राह्मण है। उन्होंने आह्वान किया कि ब्राह्मण अपनी पहचान—तिलक, रक्षा सूत्र, शिखा और उपनयन—को छुपाएं नहीं, बल्कि गर्व के साथ धारण करें।
स्वामी जी ने कहा कि विश्व की अनेक नामी कंपनियों के सीईओ ब्राह्मण हैं। ब्राह्मण पहले भी विश्व का नेतृत्व करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा ने बताया कि पूर्व में परशुराम कुंड पर 54 फीट ऊंची मूर्ति स्थापना तथा पश्चिम में जयपुर का परशुराम भवन संस्था के ड्रीम प्रोजेक्ट हैं। फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राधेश्याम गुरुजी व नरेंद्र हर्ष ने स्वागत करते हुए आश्वस्त किया कि ब्राह्मणों के मूलमंत्र का संगठन का प्रत्येक सदस्य पालन करेगा।
शिविर के अलग-अलग ‘नेतृत्व आरोहण’ सत्रों में प्रमुख विचारक बाबूलाल जी, सत्यनारायण श्रीमाली, शिव शर्मा, पूनम शर्मा ने विचार रखे।
दीक्षांत सत्र की अध्यक्षता आर.बी.शर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि युवाचार्य अभयदास महाराज थे। अन्य वक्ताओं में बाबूलाल पारीक, विनोद अमन, परमेश्वर शर्मा, श्रीकिशन जोशी मुंबई व नवीन जोशी जोधपुर शामिल रहे।
नव गति, नव लय, ताल छन्द नव नामक समापन सत्र में नीति आयोग उत्तराखंड के राज शेखर जोशी, देहरादून मुख्य वक्ता थे, हरिद्वार विधायक मदन कौशिक मुख्य अतिथि रहे। शिविर में सीए डॉ. सुनील शर्मा, मुंबई मनोज पांडे, जयपुर, परमेश्वर शर्मा सालासर, पत्रकार अमित शर्मा व विकास कुमार झा, (उपाध्यक्ष एनयूजे आई हरिद्वार उत्तराखंड) की प्रमुख भूमिका रही।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला