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देहरादून, 11 जनवरी (हि.स.)। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने कहा कि स्वामी विवेकानंद केवल एक महान दार्शनिक ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और राष्ट्रबोध के सशक्त प्रतीक हैं। उनके विचार आज भी युवाओं को आत्मनिर्भर, साहसी और लक्ष्य के प्रति समर्पित बनने की प्रेरणा देते हैं।
राष्ट्रीय युवा दिवस की पूर्व संध्या पर राज्यपाल ने अपने संदेश में युगपुरुष स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं को शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल ने कहा कि भारत का युवा आज केवल जनसंख्या का आंकड़ा नहीं, बल्कि राष्ट्र की दिशा तय करने वाली सबसे बड़ी शक्ति है। जब युवा अपने अनुभवों से सीखते हुए समाज के साथ आगे बढ़ता है, तभी सशक्त नेतृत्व का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व वही होता है, जो व्यक्तिगत सफलता से आगे बढ़कर समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए सोचता और कार्य करता है।
उन्होंने कहा कि अमृतकाल का यह युग युवाओं के लिए अवसरों के साथ-साथ उत्तरदायित्वों से भी भरा हुआ है। भारत को विकसित राष्ट्र और विश्वगुरु बनाने का संकल्प तभी साकार होगा, जब युवा अपनी ऊर्जा, नवाचार और संकल्पशक्ति को राष्ट्रनिर्माण में लगाएंगे। राज्यपाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात करें और कर्तव्य, सेवा एवं समर्पण के मार्ग पर चलते हुए राष्ट्र एवं समाज के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहभागी बनें।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार