रंग-बिरंगी पतंगों से सजा जयपुर: दामों में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
जयपुर, 11 जनवरी (हि.स.)। मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे छोटी काशी में पतंगबाजी का उल्लास अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। हालांकि संक्रांति में अभी तीन दिन शेष हैं, लेकिन शहर की छतों पर रंग-बि
रंग-बिरंगी पतंगों से सजा जयपुर: दामों में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी


रंग-बिरंगी पतंगों से सजा जयपुर


रंग-बिरंगी पतंगों से सजा जयपुर


जयपुर, 11 जनवरी (हि.स.)। मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे छोटी काशी में पतंगबाजी का उल्लास अपने चरम पर पहुंचता जा रहा है। हालांकि संक्रांति में अभी तीन दिन शेष हैं, लेकिन शहर की छतों पर रंग-बिरंगी पतंगों की उड़ान और “वो काटा… वो मारा” की गूंज ने माहौल को पूरी तरह उत्सवी बना दिया है। बच्चे हों या युवा, हर कोई हाथ में डोर थामे अपनी पतंग को आसमान में सबसे ऊंचा उड़ाने की होड़ में जुटा है।

शहर के बाजारों में भी संक्रांति की रौनक लौट आई है। रंगीन कागज से बनी पतंगें, आकर्षक डिज़ाइन और अलग-अलग आकार की पतंगें ग्राहकों को अपनी ओर खींच रही हैं। दुकानदारों ने इस बार ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए नई-नई वैरायटी की पतंगें मंगवाई हैं। दुकानों के बाहर सजी पतंगें मानो बाजारों को रंगों से भर रही हों।

हालांकि इस बार पतंगों की कीमतों में पिछले वर्ष की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, इसके बावजूद पतंगबाजी के प्रति लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ है। बाजारों में आठ रुपए से लेकर तीस रुपए तक की पतंगें उपलब्ध हैं। दुकानदारों का कहना है कि जैसे-जैसे संक्रांति नजदीक आएगी, मांग में और तेजी आएगी।

जयपुर के हांडीपुरा, किशनपोल बाजार, चांदपोल बाजार सहित प्रमुख इलाकों में पतंगों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ बढ़ने लगी है। शाम होते ही लोग परिवार के साथ खरीदारी के लिए बाजारों का रुख कर रहे हैं। हांडीपुरा बाजार पतंगों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां पांच रुपए से लेकर सौ रुपए तक की पतंगें उपलब्ध हैं। छोटे बच्चों के लिए रंगीन पन्नी (प्लास्टिक) की पतंगें पांच से बीस रुपए में मिल रही हैं, जबकि अनुभवी और पेशेवर पतंगबाजों के लिए कागज की विशेष पतंगें भी मौजूद हैं।

मांझे की बात करें तो बरेली और रामपुर से आने वाले मांझे के साथ-साथ स्थानीय मांझे की भी अच्छी खासी मांग है। इसकी कीमत 500 से 1200 रुपए प्रति गट्ठा तक जा रही है। खरीदार पतंग के ‘ठड्डे’ की मजबूती और कागज की गुणवत्ता देखकर ही सौदा तय कर रहे हैं।

इसके अलावा रामगंज बाजार, आदर्श नगर, विद्याधर नगर, झोटवाड़ा और आमेर क्षेत्रों में पतंग लूटने का सामान भी बिक रहा है। इन बाजारों में पतंग लूटने के उपकरण 50 से 300 रुपए तक उपलब्ध हैं। कांटेदार झाड़ियां 50 से 150 रुपए में, जबकि 10 से 15 फीट लंबे बांस 100 से 300 रुपए तक बिक रहे हैं। बांस के आगे कांटेदार झाड़ी बांधकर कटी पतंगों को फंसाने का सामान तैयार किया जाता है।

व्यापारी अशोक गुप्ता ने बताया कि मकर संक्रांति से करीब दो महीने पहले ही हांडीपुरा में काम की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। यहां बाहर से भी कारीगर बुलाए जाते हैं। जयपुर की पतंगबाजी का आकर्षण ऐसा है कि बॉलीवुड सेलिब्रिटीज से लेकर विदेशी पर्यटक तक यहां की छतों पर पतंग उड़ाने पहुंचते हैं। अलग-अलग शहरों से कच्चा माल आता है, लेकिन जयपुर के कारीगरों की फिनिशिंग इसे ‘जयपुर ब्रांड’ बनाती है। संक्रांति के पूरे सीजन में जयपुर का पतंग उद्योग करोड़ों रुपए का राजस्व पैदा करता है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका चलती है।

व्यापारी गणेश सैनी ने बताया कि इस वर्ष जयपुर में स्थानीय पतंगों के साथ-साथ अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और बरेली में बनी पतंगें भी बाजार में आई हैं। पतंग उड़ाने में इस्तेमाल होने वाली डोर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली से मंगाई गई है। जयपुर में सात से आठ महीने तक पतंग निर्माण का कार्य चलता है, लेकिन मांग के मुकाबले उत्पादन कम होने के कारण हर साल बाहर से भी बड़ी संख्या में पतंगें मंगवाई जाती हैं।

होलसेल के बाद अब रिटेल बाजार पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। इस साल कागज की पतंगों की सबसे ज्यादा मांग देखी जा रही है। वहीं पन्नी की पतंगें नए-नए आकारों में बाजार में आई हैं, जिनमें मटका, स्टार और रॉकेट शेप प्रमुख हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कार्टून कैरेक्टर और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थीम वाली पतंगें भी लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।

व्यापारियों के अनुसार एक समय काछी मोहल्ला क्षेत्र में 50 से अधिक कारीगर पतंग निर्माण से जुड़े थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 5 से 8 रह गई है। नई पीढ़ी इस पारंपरिक कार्य में रुचि नहीं ले रही है। वहीं त्योहारों और आयोजनों में थीम डेकोरेशन का चलन बढ़ने से छोटी सजावटी पतंगों की मांग तेजी से बढ़ी है। दो से पांच इंच तक की छोटी पतंगें और फिरकियां सजावट के लिए खरीदी जा रही हैं। महंगाई के बावजूद पतंगबाजी का यह उत्साह यही बताता है कि जैसे-जैसे मकर संक्रांति नजदीक आएगी, छोटी काशी का आसमान और भी अधिक रंगीन नजर आएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश