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पूर्वी सिंहभूम, 11 जनवरी (हि.स.)। मानगो बस स्टैंड के पास हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने एक पूरे परिवार को उजाड़ दिया। शनिवार को हादसे में पति की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल पत्नी ने रविवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। पति-पत्नी दोनों की असमय मौत से उनके दो मासूम बच्चे अनाथ हो गए हैं, जिससे पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मानगो डिमना रोड स्थित विश्वकर्मा लाइन निवासी लाल शर्मा शनिवार को मानगो बस स्टैंड के पास एक तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आ गए। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि लाल शर्मा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी नीलू शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गईं। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तुरंत एमजीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत लगातार नाजुक बनी रही। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद रविवार की सुबह नीलू शर्मा ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
इस हादसे की खबर फैलते ही घटनास्थल और अस्पताल परिसर में लोगों की भारी भीड़ जुट गई। लोगों में शोक के साथ-साथ प्रशासन के प्रति गहरा रोष भी देखने को मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक और ट्रैफिक व्यवस्था की लापरवाही का नतीजा है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, मानगो बस स्टैंड क्षेत्र पहले से ही दुर्घटना संभावित जोन बन चुका है। यहां दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही रहती है, लेकिन इसके बावजूद न तो ट्रैफिक पुलिस की पर्याप्त तैनाती की जाती है और न ही यातायात को सुचारू रखने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं। लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई सिर्फ हेलमेट जांच और चालान काटने तक सीमित रह गई है।
इसके अलावा सड़क किनारे खड़े वाहन, अवैध बस और ऑटो स्टैंड तथा भीषण जाम की स्थिति हादसों को और बढ़ावा दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने रविवार को सीतारामडेरा थाना पहुंचकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि मानगो बस स्टैंड क्षेत्र में स्थायी और प्रभावी ट्रैफिक व्यवस्था लागू की जाए, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और हादसों पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
लोगों ने मृतक दंपति के दोनों बच्चों को तत्काल मुआवजा, सरकारी सहायता और संरक्षण देने की भी मांग की। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते ठोस कदम उठाता, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक