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भागलपुर, 11 जनवरी (हि.स.)। भागलपुर में 27 साल से अदालतों के गलियारों में घूम रहा भूमि विवाद आखिरकार जमीन पर उतर आया। महात्मा गांधी रोड स्थित सिविल सर्जन कम्पाउंड में रविवार को जैसे ही प्रशासन का पीला पंजा गरजा पूरे इलाके में हलचल मच गई। कोर्ट के आदेश के बाद एक साथ दो बुलडोजर चले और देखते ही देखते पांच दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। पीला पंजा चलते ही दुकानदारों में हड़कंप मच गया। कोई शटर गिराता नजर आया तो कोई आनन-फानन में सामान समेटता दिखा। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कार्रवाई के दौरान कोर्ट के नाजिर, अधिवक्ता और दंडाधिकारी मौके पर मौजूद रहे और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते रहे। हालांकि कुछ ही देर बाद घटनास्थल पर सदर अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार पहुंचे। स्थिति का जायजा लेने के बाद उन्होंने बड़ा फैसला लिया और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को फिलहाल 15 दिनों के लिए रोक दिया।
सदर एसडीओ विकास कुमार ने बताया कि प्रशासन को सूचना मिली थी कि कार्रवाई जारी रहने से विधि-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अस्थायी रोक लगाई गई है। उन्होंने साफ किया कि आगे न्यायालय से जो भी आदेश आएगा उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि यह विवाद वर्ष 1998 से न्यायालय में चल रहा था। स्थानीय महिला आशा देवी ने वर्ष 2011 में निचली अदालत से केस जीता था और 2024 में अपील में भी उनके पक्ष में फैसला आया। इसके बाद कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। जिसके अनुपालन में यह कार्रवाई शुरू की गई। मामले की कहानी वर्ष 1985 के सर्वे से जुड़ी है। जब सरकारी अमीन बैजनाथ गुप्ता द्वारा किए गए सर्वे में सिविल सर्जन कम्पाउंड के एक हिस्से को आशा देवी के नाम से दर्ज कर दिया गया। जबकि जमीन का खतियान सरकारी बताया जाता है। इस गड़बड़ी के उजागर होने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने सरकारी अमीन को बर्खास्त भी किया था। इसके बाद 1998 में यह मामला कोर्ट पहुंचा। सरकारी अपील निचली अदालतों में खारिज होती रही। मामला हाईकोर्ट में भी पहुंचा, लेकिन अब तक कोई स्टे नहीं मिला है।
सिविल सर्जन के लीगल एडवाइजर अब्दुल रब्बानी के अनुसार मामला फिलहाल हाईकोर्ट में लंबित है और वहां से कोई नया आदेश नहीं आया है। अब सवाल यह है कि 15 दिन बाद कोर्ट क्या रुख अपनाता है और सिविल सर्जन कम्पाउंड में अतिक्रमण पर पीला पंजा दोबारा चलेगा या नहीं। भागलपुर की नजरें अब अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर