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जयपुर, 11 जनवरी (हि.स.)। जयपुर के जगतपुरा स्थित महल रोड पर रविवार सेना दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल के दूसरे दिन भारतीय सेना की थल, नभ और तकनीकी ताकत का भव्य प्रदर्शन किया गया। चारों ओर सेना की वर्दी में कदमताल करते जवान, आसमान में मंडराते लड़ाकू हेलिकॉप्टर और सड़कों पर गर्जना करते टैंक-मिसाइल दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे।
रिहर्सल के दौरान सेना के जवानों ने बाइक पर हैरतअंगेज करतब दिखाए। सात बाइकों पर 27 जवानों ने ह्यूमन पिरामिड बनाकर अद्भुत संतुलन और अनुशासन का परिचय दिया। चलती बाइकों पर जवानों ने सुदर्शन चक्र और अशोक स्तंभ की आकृति बनाकर यह संदेश दिया कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में राष्ट्र की रक्षा के लिए तत्पर है।
रिहर्सल में मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम का प्रदर्शन किया गया, जो 20 सेकेंड में 40 से अधिक रॉकेट दागने में सक्षम है। इसके साथ ही 300 किलोमीटर तक मार करने वाले यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ‘सूर्यास्त’ की क्षमताओं से भी लोगों को रूबरू कराया गया, जो एक साथ छह मिसाइल दाग सकता है।
भारतीय सेना के अपाचे AH-64E लड़ाकू हेलिकॉप्टर ने आसमान से दुश्मन के ठिकानों पर हमले का प्रदर्शन किया। वहीं चीता और चेतक हेलिकॉप्टरों ने भी साहसिक करतब दिखाए। रिहर्सल में हेलिकॉप्टर लॉन्च्ड एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल ‘हेलिना’ का भी प्रदर्शन किया गया।
परेड अभ्यास में के-9 वज्र-टी टैंक और स्वदेशी अर्जुन मार्क-1 तथा उसके उन्नत संस्करण मार्क-1ए को प्रदर्शित किया गया। अर्जुन टैंक अपनी जबरदस्त फायर पावर, मजबूत कवच और अत्याधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम के लिए जाना जाता है, जिससे दिन-रात सटीक निशाना संभव है। रिहर्सल के दौरान 210 रॉकेट रेजिमेंट की झांकी प्रस्तुत की गई, जिसमें पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर, क्विक रिएक्शन फाइटर व्हीकल, लाइट स्ट्राइक व्हीकल, एंटी टैंक मोबाइल टीम, व्हीकल माउंटेड इन्फेंट्री मोर्टार सिस्टम और नाग मिसाइल की क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर आत्मनिर्भर भारत की झलक भी देखने को मिली। स्वदेशी तकनीक से लैस मिसाइल प्रणालियों, हाई मोबिलिटी बुलेटप्रूफ रिकॉग्निशन व्हीकल, आधुनिक ड्रोन और रोबोटिक सैनिकों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अत्याधुनिक कैमरों और रोबोटिक योद्धाओं से सजी सेना की झांकी विशेष आकर्षण रही। रिहर्सल में सेना की घुड़सवार बटालियन और हाल ही में गठित भैरव बटालियन ने भी भाग लिया। अदृश्य और अदम्य टैगलाइन वाली भैरव बटालियन चीन-पाकिस्तान सीमा सहित देश के भीतर किसी भी चुनौती से निपटने में सक्षम मानी जाती है। 15 जनवरी को आयोजित होने वाली 78वीं सेना दिवस परेड से पूर्व यह रिहर्सल भारतीय सेना की युद्ध क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और अद्वितीय उदाहरण है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक