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- डॉ. मयंक चतुर्वेदी
यह कोई साधारण जनवरी नहीं है। यह वह समय है जब राष्ट्र अपनी सबसे बड़ी पूंजी, यानी युवा शक्ति से सीधा संवाद करने जा रहा है। प्रश्न सरल है, पर गहन है। क्या हम केवल भविष्य की बातें करेंगे या भविष्य का निर्माण भी करेंगे। इसी प्रश्न के केंद्र में 12 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाला विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग खड़ा है और इसी संवाद की धड़कन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वह आवाज सुनाई देती है जो युवाओं उनके साथ मिलकर राष्ट्र निर्माण की यात्रा तय करना चाहती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि “अद्भुत जोश और बेमिसाल जज्बे से भरी हमारी युवा शक्ति सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के लिए संकल्पबद्ध है।” यह कथन देखा जाए तो समकालीन भारत की राजनीतिक और सामाजिक चेतना का सार है। यह वक्तव्य प्रधानमंत्री मोदी के आधिकारिक वक्तव्यों के संकलन Exam Warriors में युवाओं के संदर्भ में व्यक्त विचारों की निरंतरता को दर्शाता है (लेखक: नरेंद्र मोदी, प्रकाशक: पेंग्विन इंडिया, संस्करण 2018, पृष्ठ 23)।
12 जनवरी 2026 को स्वामी विवेकानंद की जयंती और राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस संवाद में प्रधानमंत्री देशभर से चयनित लगभग तीन हजार युवा नेताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रवासी समुदाय के युवा प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। यह संवाद इस विश्वास को पुष्ट करता है कि भारत का युवा सिर्फ सुनने वाला वर्ग नहीं, बल्कि नीति निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार है। यही कारण है कि इस मंच पर युवा नेता शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, सामाजिक न्याय, पर्यावरण और शासन जैसे विषयों पर अपना संवाद करने आज प्रखरता के साथ संवाद करने आगे आ रहे हैं ।
अब प्रश्न उठता है कि 12 जनवरी ही क्यों। इसका उत्तर भारत की राष्ट्रीमय चेतना से जुड़ा है। 12 जनवरी 1863 को जन्मे स्वामी विवेकानंद भारत के लिए सिर्फ एक संन्यासी नहीं थे, वे भारत की युवा चेतना के शिल्पकार हैं। उनका प्रसिद्ध कथन “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” आज भी युवाओं के लिए जीवन मंत्र है। यह उद्धरण स्वामी विवेकानंद की पुस्तक Lectures from Colombo to Almora में संकलित है (लेखक: स्वामी विवेकानंद, अद्वैत आश्रम प्रकाशन, कोलकाता, पृष्ठ 16)। स्वामी विवेकानंद का विश्वास था कि युवा समाज की सबसे शक्तिशाली ऊर्जा होते हैं। उन्होंने कहा था कि युवाओं में लोहे जैसी मांसपेशियां और फौलादी नसें होनी चाहिए, जिनका हृदय वज्र तुल्य संकल्प से भरा हो। यह विचार The Complete Works of Swami Vivekananda के खंड 3 में युवाओं को संबोधित व्याख्यानों में मिलता है (लेखक: स्वामी विवेकानंद, अद्वैत आश्रम, खंड 3, पृष्ठ 242)।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत, स्वस्थ भारत और विकसित भारत की जो परिकल्पना प्रस्तुत की जा रही है, वह विवेकानंद के उसी वज्र संकल्प का आधुनिक रूप है। आत्मनिर्भर, स्वस्थ भारत अभियान के अंतर्गत ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर किया जा रहा निवेश इस विचार को मजबूत करता है कि स्वस्थ नागरिक ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। यह वही विचार है जिसे विवेकानंद ने कहा था कि कमजोरी मृत्यु है और शक्ति ही जीवन है, जिसका उल्लेख The Complete Works of Swami Vivekananda, खंड 1, पृष्ठ 18 पर मिलता है। शिक्षा के क्षेत्र में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी विवेकानंद के विचारों की ही प्रतिध्वनि है। स्वामी विवेकानंद ने स्पष्ट कहा था कि शिक्षा जानकारियों का बोझ नहीं होनी चाहिए, वह चरित्र निर्माण का साधन बने। यह कथन My Idea of Education नामक संकलन में मिलता है (लेखक: स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण मिशन, पृष्ठ 32)।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने स्वामी विवेकानंद के विषय में लिखा था कि स्वामीजी इसलिए महान हैं क्योंकि उन्होंने पूर्व और पश्चिम, धर्म और विज्ञान, अतीत और वर्तमान के बीच सामंजस्य स्थापित किया। यह उद्धरण नेताजी की पुस्तक The Indian Struggle में विवेकानंद पर लिखी टिप्पणी से उद्धृत है (लेखक: सुभाष चंद्र बोस, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, पृष्ठ 288)। प्रसिद्ध इतिहासकार ए. एल. बाशम कहते हैं कि स्वामी विवेकानंद को भविष्य में आधुनिक दुनिया के प्रमुख निर्माताओं में याद किया जाएगा। यह टिप्पणी उनकी पुस्तक The Wonder That Was India के उपसंहार भाग में मिलती है (लेखक: ए. एल. बाशम, पेंग्विन बुक्स, पृष्ठ 562)।
स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को निर्भय बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सारी शक्ति मनुष्य के भीतर है और यह सोच कि हम कमजोर हैं, सबसे बड़ा भ्रम है। यह विचार The Complete Works of Swami Vivekananda, खंड 2, पृष्ठ 299 में स्पष्ट रूप से मिलता है। वे चाहते थे कि युवा सामाजिक सेवा में उतरें, समाज के सबसे कमजोर वर्ग को अपना भगवान मानें और सेवा को साधना समझें। आज विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग उसी सेवा और साधना को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा है। डिजाइन फॉर भारत और टेक फॉर विकसित भारत जैसी पहलें यह बताती हैं कि तकनीक अब सिर्फ सुविधा नहीं रही है या हो सकती है, यह इससे कहीं आगे सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन गई है।
आज कहना यही होगा कि स्वामी विवेकानंद केवल भारत की युवा चेतना के जागरण के सबसे प्रखर उद्घोषक हैं। उन्होंने युवाओं की बुद्धि, शक्ति और आत्मविश्वास को पहचानते हुए उन्हें यह अमर संदेश दिया था कि “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको।” यह वाक्य केवल राष्ट्र निर्माण का सूत्र है। विवेकानंद का विश्वास था कि युवा केवल समाज का हिस्सा नहीं होते, वे ही परिवर्तन के वाहक होते हैं। इसी कारण उन्होंने युवाओं से अपार आशाएं रखीं और उन्हें भारत के भविष्य का शिल्पकार माना।
राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी कालजयी कृति संस्कृति के चार अध्याय में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक योगदान को अत्यंत सटीक शब्दों में अभिव्यक्त किया है। दिनकर लिखते हैं कि अभिनव भारत को जो कुछ कहना था, वह विवेकानंद के मुख से प्रकट हुआ। विवेकानंद नए भारत की दिशा स्पष्ट करके के साथ स्वयं वह सेतु बने, जहां प्राचीन भारत की आध्यात्मिक परंपरा और आधुनिक भारत की कर्मठ चेतना एक-दूसरे से जुड़ती है। उनके विचारों में परंपरा का गर्व भी है और भविष्य की स्पष्ट दृष्टि भी।
स्वामी विवेकानंद की जयंती पर राष्ट्रीय युवा दिवस के पावन क्षण में हम उस महान विचारक को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने युवा शक्ति को राष्ट्र की जीवन ऊर्जा और सामाजिक प्रगति की मूल प्रेरक शक्ति माना। उन्होंने यह सिखाया कि राष्ट्र का उत्थान केवल नीतियों से नहीं, बल्कि जाग्रत, चरित्रवान और सेवा-भाव से प्रेरित युवाओं से होता है। आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, हमारे दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा पीढ़ी की असीम संभावनाओं को पहचाना है और उन्हें सही दिशा देने का संकल्प लिया है। उन्होंने युवाओं को ज्ञान, कौशल और सेवा के पथ पर आगे बढ़ने का आह्वान किया। उनके दृष्टिकोण में “GYAN” केवल एक शब्द नहीं, बल्कि समावेशी विकास का दर्शन है, जहां “जी” गरीबों के कल्याण का प्रतीक है, “वाई” युवा सशक्तीकरण का संकल्प है, “ए” अन्नदाताओं और खाद्य प्रदाताओं के समर्थन का भाव है और “एन” नारी कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वस्तुत: हमारे प्रधानमंत्री मोदी का भी यही विश्वास है कि जब युवा अपने सामर्थ्य को पहचानते हैं, तो राष्ट्र स्वयं नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर होता है। अमृत काल में विकसित भारत की यात्रा में 12 जनवरी 2026 के संदर्भ में कहना होगा यह युवा आत्मविश्वास, राष्ट्रीय संकल्प और विवेकानंद के स्वप्न का जीवंत उत्सव है। यही उस महान संन्यासी को सच्ची श्रद्धांजलि है और यही भारत के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत आधारशिला भी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी