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कोलकाता, 10 जनवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) अभियान के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हावड़ा जिले के बगनान विधानसभा क्षेत्र के सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) मौसम सरकार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि 'तार्किक विसंगति' (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी) के नाम पर बड़ी संख्या में वास्तविक और वंचित वर्ग के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश रची जा रही है।
ब्लॉक आपदा प्रबंधन विभाग में अधिकारी और बगनान ब्लॉक-दो के एईआरओ मौसम सरकार ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) अचिंत्य कुमार मंडल को अपना त्यागपत्र सौंपा। उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया कि आगामी 14 जनवरी से ब्लॉक में 'तार्किक विसंगतियों' को लेकर सुनवाई शुरू होनी है, जिससे पहले वे इस प्रक्रिया से खुद को अलग करना चाहते हैं। बता दें कि अकेले बगनान ब्लॉक-दो में लगभग 24 हजार ऐसे मामले सामने आए हैं।
संवाददाताओं से बातचीत में मौसम सरकार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन नामों को 'विचित्र पारिवारिक वृक्ष' (वियर्ड फैमिली ट्री) या विसंगति की श्रेणी में डाला गया है, वे वास्तव में स्पेलिंग (वर्तनी) की त्रुटियां हैं। उन्होंने कहा, 2002 की मतदाता सूची में जो गलतियां थीं, उन्हें लोगों ने निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत फॉर्म-आठ भरकर सुधारा था। अब उन्हीं सुधारों को विसंगति बताकर लोगों को परेशान किया जा रहा है।
इस्तीफा देने वाले अधिकारी का दावा है कि इन विसंगतियों को दूर करने के लिए 12 प्रकार के विशिष्ट दस्तावेजों की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा, वंचित और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के पास वोटर कार्ड, आधार कार्ड और राशन कार्ड तो हैं, लेकिन वे स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। उनके पास अन्य अनिवार्य दस्तावेज नहीं हैं, जिससे एक विशेष वर्ग के लोगों के मताधिकार छीनने का खतरा पैदा हो गया है।
ईआरओ अचिंत्य कुमार मंडल ने इस्तीफा मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने इसे उच्च अधिकारियों को भेज दिया है। इस घटना के बाद से राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता