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हरिद्वार, 10 जनवरी (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की की पहल पर उत्तराखंड राज्य और जर्मनी के ब्रांडेनबुर्ग राज्य सरकार के बीच संयुक्त आशय घोषणा पर हस्ताक्षर किये गए। यह घोषणा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में संरचित राज्य-स्तरीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह संयुक्त आशय घोषणा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग, नवाचार और कौशल विकास को सुदृढ़ करने के साथ उच्च शिक्षा और अनुसंधान में वैश्विक सहभागिता को बढ़ावा देगी। घोषणा के अंतर्गत एक संयुक्त सूचना एवं कौशल केंद्र की स्थापना, भारत-जर्मनी स्टार्ट-अप्स पर केंद्रित एक उद्योग संपर्क कार्यालय का सृजन सहित राज्य-स्तरीय संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों का विकास, चिन्हित प्राथमिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं तथा दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक और पारंपरिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना शामिल है।
यह सहयोग आपसी महत्व के प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा, जिनमें आपदा लचीलापन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियां कृषि, जलवायु और पर्यावरण निगरानी के लिए ड्रोन एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियां, स्वच्छ ऊर्जा और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था, नवीन सामग्री और उन्नत विनिर्माण तथा ई-गवर्नेंस, स्वास्थ्य सेवा और साइबर सुरक्षा में डेटा विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग शामिल हैं।
घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर के समय मौजूद प्रतिनिधिमंडल में आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत, प्रो. वी.सी. श्रीवास्तव, डीन (अंतरराष्ट्रीय संबंध) तथा एसोसिएट प्रोफेसर अंकित अग्रवाल, उत्तराखंड सरकार के तकनीकी शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. त्रिप्ता ठाकुर, जर्मन प्रतिनिधिमंडल में ब्रांडेनबुर्ग संघीय राज्य की विज्ञान, अनुसंधान एवं सांस्कृतिक मामलों की मंत्री डॉ. मान्या शुले, यूनिवर्सिटी ऑफ पॉट्सडैम के अध्यक्ष प्रो. ओलिवर ग्यूंथर, ब्रांडेनबुर्ग यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी कॉटबस-सेनफ्टेनबर्ग के उपाध्यक्ष प्रो. वोल्फ्राम बर्गर, तथा ब्रांडेनबुर्ग राज्य के विज्ञान, अनुसंधान एवं सांस्कृतिक मंत्रालय से डॉ. वीरा ज़ीगेलडॉर्फ शामिल थीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला