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फतेहाबाद, 10 जनवरी (हि.स.)। जिले के गांव भूथन कलां के बेटे सुरेंद्र ढाका ने अदम्य साहस और इच्छाशक्ति का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसे सुनकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद, जब सामान्य चलना भी संभव नहीं था, तब सुरेंद्र ढाका ने अरब सागर में धरमतर जेट्टी से गेटवे ऑफ इंडिया तक की चैनल स्विम को सफलतापूर्वक तैरकर पार कर इतिहास रच दिया।
यह उपलब्धि केवल एक तैराकी प्रतियोगिता नहीं, बल्कि हिम्मत, आत्मविश्वास और मजबूत इरादों की जीत है। करीब 9.40 किलोमीटर लंबे समुद्री क्षेत्र को पार करना एक बेहद कठिन और जोखिम भरा एडवेंचर माना जाता है, जिसे सुरेंद्र ढाका ने मात्र 9 घंटे 40 मिनट में पूरा कर दिखाया इस अद्भुत प्रदर्शन के साथ उन्होंने न केवल स्वयं को साबित किया, बल्कि हरियाणा के लिए गोल्ड मेडल जीतकर प्रदेश का नाम भी रोशन किया। उनकी यह सफलता दर्शाती है कि शारीरिक सीमाएं कभी भी मानसिक शक्ति के आगे बाधा नहीं बन सकतीं। सुरेंद्र ढाका ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा योद्धा वही होता है, जो विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए अपने सपनों को साकार करता है। आज वे न केवल फतेहाबाद या हरियाणा, बल्कि देशभर के लाखों युवाओं और दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि यह संदेश देती है कि इंसान को महान उसका शरीर नहीं, बल्कि उसका हौसला बनाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / अर्जुन जग्गा