Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

बरेली, 10 जनवरी (हि.स.) । हार्टमन रामलीला ग्राउंड की जमीन को लेकर चले आ रहे 24 साल पुराने मुकदमे में नगर निगम को बड़ी कानूनी जीत मिली है। अपर सिविल जज द्वितीय श्वेता श्रीवास्तव की अदालत ने बाल कल्याण समिति के कब्जे और कथित पट्टे से जुड़े वाद को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ किया कि 5646 वर्गमीटर विवादित भूमि नगर निगम बरेली की है। कोर्ट ने कहा कि वादी के पक्ष में किया गया पट्टा प्रारंभ से ही शून्य है और ऐसे शून्य पट्टे के आधार पर लिया गया कब्जा किसी भी तरह का कानूनी अधिकार नहीं देता।
अदालत में सुनवाई के दौरान यह दावा किया गया कि वर्ष 2000 में रामलीला समिति को पट्टा दिया गया था, लेकिन प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहियां इस दावे को साबित नहीं कर सकीं। वादी मुरारी लाल अग्रवाल और वादी साक्षी जितेंद्र चौहान ने प्रति-परीक्षा में स्वीकार किया कि उन्हें समिति के पंजीकरण की तारीख तक की जानकारी नहीं है। इससे वादी का पूरा दावा कमजोर हो गया। अदालत ने टिप्पणी की कि रामलीला समिति के तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा बाल कल्याण समिति के नाम जारी किया गया पट्टा फर्जी और अनधिकृत था तथा यह कथित रूप से दुरभिसंधि का परिणाम प्रतीत होता है, जबकि विवादित भूमि शुरू से नगर निगम की संपत्ति रही है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्लॉट संख्या 217, 218 और 219, कुल 5646 वर्गमीटर भूमि पर वादी समिति किसी भी रूप में कानूनी रूप से अधिवासी नहीं है। वादी की ओर से वर्षों पुराने और स्थायी कब्जे की दलील को भी खारिज कर दिया गया। अदालत ने कहा कि जब कब्जे का आधार ही शून्य पट्टा हो, तो उसे न वैध माना जा सकता है और न ही संरक्षण दिया जा सकता है।
नगर निगम के अधिवक्ता प्रमोद भटनागर के शनिवार काे बताया कि यह मुकदमा नवंबर 2002 में दायर किया गया था। 24 साल बाद आए इस फैसले से न सिर्फ नगर निगम के अधिकारों की पुष्टि हुई है, बल्कि सरकारी जमीन पर फर्जी पट्टों और पुराने कब्जों की आड़ में किए जा रहे अतिक्रमण के खिलाफ सख्त संदेश भी गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार