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मुंबई ,10 जनवरी ( हि.स.)।हम अपने जीन तो नहीं बदल सकते, लेकिन अपना लाइफस्टाइल बदल सकते हैं। जब तक हम अपना लाइफस्टाइल नहीं बदलेंगे, बीमारियां हमारा पीछा नहीं छोड़ेंगी। ये बीमारियां जेनेटिक्स के रूप में अगली पीढ़ी को मिलेंगी। इसलिए, अपना लाइफस्टाइल बदलें, बीमारियों से बचें, यह रामबाण उपाय दीनानाथ मंगेशकर हॉस्पिटल, पुणे की जानी-मानी मेडिकल जेनेटिसिस्ट डॉ. कौमुदी गोडबोले ने बताया।विधायक संजय केलकर द्वारा ठाणे के नौपाड़ा में सरस्वती स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स ग्राउंड में जेनेटिक्स से होने वाली बीमारियां और उनके इलाज टॉपिक पर 40वीं रामभाऊ म्हालगी मेमोरियल लेक्चर सीरीज का दूसरा फूल शुक्रवार को डॉ. कौमुदी गोडबोले ने खोला। इस मौके पर व्याख्यान माला के इस सत्केर चेयरमैन डॉ. अमोल गीते और सुहास जावड़ेकर मंच पर मौजूद थे। इस दौरान व्याख्यान समिति की माधुरी तम्हाणे, पूर्व उपमहापौर सुभाष काले, टीजेएसबी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विद्याधर वैशम्पायन, विजय जोशी आदि श्रोताओं में शामिल थे। डॉ. कौमुदी गोडबोले ने सरल भाषा में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में प्रसारित होने वाली आनुवंशिक बीमारियों और उनके उपचारों के बारे में बताया। आनुवंशिक बीमारियां हमारे डीएनए में तत्वों के कारण होती हैं। कुछ जैविक परिवर्तनों के कारण, इन जीनों में परिवर्तन होते हैं। यह परिवर्तन (म्यूटेशन) एक ही जीन या पूरे क्रोमोसोम में हो सकता है। बीमारियों को सिर्फ देखकर पहचाना नहीं जा सकता, न ही हमें हर बीमारी के जीन का पता होता है। सोनोग्राफी सिर्फ फोटोग्राफी है, ऐसे में जेनेटिक टेस्ट महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि, जेनेटिक टेस्ट रैंडमली नहीं किए जाते हैं, संबंधित की पूर्व अनुमति आवश्यक है, डॉ. गोडबोले ने बताया। उन्होंने सलाह दी कि बच्चे के जन्म से पहले माँ की जीनोम सीक्वेंसिंग कर लेनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अगर सही समय पर सही डायग्नोसिस और सावधानी बरती जाए तो जेनेटिक बीमारियों को दूर किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, 'क्योंकि देश में जेनेटिक्स के क्षेत्र में ज़रूरी रिसर्च नहीं हुई है, इसलिए यह डायग्नोस्टिक तरीका आम आदमी के लिए बहुत महंगा होता जा रहा है। इसलिए, भले ही हम अपने जीन नहीं बदल सकते, लेकिन अपनी लाइफस्टाइल बदलकर इसे रोकना आसान है।' साथ ही, इस क्षेत्र में ज़्यादा से ज़्यादा रिसर्च करके इस डायग्नोस्टिक तरीके को आम आदमी तक पहुँचाने की दिशा में कदम उठाने की ज़रूरत है। असल में, जब भारत में इस तरह की रिसर्च होगी, तभी जेनेटिक बीमारियों को दूर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सोसाइटी ऑफ़ जेनेटिक डॉक्टर्स इसके लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अगर इस बारे में डिटेल में जानकारी चाहिए, तो वह जेनेटिक्स फॉर द पीपल किताब में ऑनलाइन देखी जा सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा