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धर्मशाला, 10 जनवरी (हि.स.)। उपमुख्य सचेतक एवं शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया ने केंद्र की भाजपा सरकार पर मनरेगा योजना को जानबूझकर कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। शनिवार को धर्मशाला में आयोजित एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए केवल पठानिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने न केवल मनरेगा का स्वरूप बदलने की कोशिश की है, बल्कि इसके प्रावधानों में बदलाव कर गरीबों के कानूनी अधिकारों पर भी सीधा हमला किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को चुपचाप नहीं सहेगी और मनरेगा को बचाने के लिए गांव से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
विधायक पठानिया ने केंद्र सरकार से मनरेगा पर 'श्वेतपत्र' जारी करने की पुरजोर मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके कार्यकाल के दौरान अब तक मनरेगा के लिए कितना बजट आवंटित और जारी किया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए सरकार ने इसे एक साधारण सरकारी योजना के रूप में नहीं, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के लिए एक मजबूत कानूनी अधिकार के रूप में लागू किया था, जिसे वर्तमान सरकार अब धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश रच रही है।
केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए पठानिया ने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश करना भाजपा की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने तंज कसा कि एक तरफ प्रधानमंत्री और भाजपा नेता गांधी जी के नाम पर स्वच्छता अभियान चलाकर वाहवाही लूटते हैं, वहीं दूसरी ओर गांधी जी के नाम से जुड़ी सबसे बड़ी जन-कल्याणकारी योजना को खत्म करने पर तुले हैं।उन्होंने कहा कि मजदूरों को 9 से 11 महीने की देरी से भुगतान किया जा रहा है, जो उनके पेट पर लात मारने जैसा है। पठानिया के अनुसार, मनरेगा को कमजोर करने का सीधा अर्थ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के संविधान पर हमला करना है, क्योंकि यह योजना ग्रामीण भारत की रीढ़ है।
आगामी रणनीति साझा करते हुए उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के तहत एक महीने तक व्यापक आंदोलन चलाएगी। यह संघर्ष ब्लॉक स्तर से शुरू होकर गांव-गांव तक पहुंचेगा।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया