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तेहरान, 10 जनवरी (हि.स.)। ईरान के दो सबसे प्रभावशाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फिल्मकारों जाफर पनाही और मोहम्मद रसूलोफ ने देश में लागू संचार ब्लैकआउट की कड़ी निंदा की है। दोनों ने इसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा को छिपाने के लिए सरकार द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा “दमन का खुला हथियार” करार दिया है।
शनिवार को सोशल मीडिया पर जारी एक संयुक्त बयान में दोनों फिल्मकारों ने कहा कि ईरानी शासन ने देश के भीतर संचार के सभी माध्यमों—इंटरनेट, मोबाइल फोन और लैंडलाइन—को बंद कर दिया है, जिससे लोग आपस में संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। इसके साथ ही, देश को पूरी तरह बाहरी दुनिया से भी काट दिया गया है।
बयान में कहा गया, “एक तरफ ईरानी शासन ने देश के अंदर संचार के रास्ते बंद कर दिए हैं और दूसरी तरफ उसने बाहरी दुनिया से संपर्क के सभी साधनों को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है।” उन्होंने चिंता जताई कि इस ब्लैकआउट के कारण आम नागरिक, उनके परिवार, दोस्त और सहकर्मी “असहाय” स्थिति में छोड़ दिए गए हैं।
फिल्मकारों ने कहा कि वे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर “गंभीर रूप से चिंतित” हैं और मौजूदा हालात में चुप्पी साधे रखना भविष्य में भारी पछतावे का कारण बन सकता है। बयान के अंत में उन्होंने चेतावनी दी, “इतिहास गवाह है कि आज की खामोशी कल गंभीर परिणाम ला सकती है।”
जाफर पनाही को पिछले वर्ष मई में अपनी फिल्म ‘इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट’ के लिए कान फिल्म महोत्सव का सर्वोच्च पुरस्कार मिला था। वह लंबे समय से ईरानी सरकार के निशाने पर रहे हैं और कई बार जेल जा चुके हैं। हाल ही में वह 2022 से 2023 के बीच कारावास की सजा काट चुके हैं।
वहीं, मोहम्मद रसूलोफ को उनकी फिल्म ‘द सीड ऑफ द सेक्रेड फिग’ के लिए ऑस्कर नामांकन मिला था। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोपों में ईरान की एक अदालत द्वारा जेल की सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें 2024 में देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों और संचार प्रतिबंधों के बीच इन दो प्रमुख सांस्कृतिक हस्तियों की यह प्रतिक्रिया सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव को और बढ़ा सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / आकाश कुमार राय