गीता बालमुचू बनीं भाजपा पश्चिमी सिंहभूम की जिला अध्यक्ष
पश्चिमी सिंहभूम, 10 जनवरी (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी पश्चिमी सिंहभूम जिला इकाई ने संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत शनिवार को गीता बालमुचू को सर्वसम्मति से जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके चयन को पार्टी संगठन ने महिला सशक्तिकरण, आदिवासी नेतृत्व को आ
गीता बालमुचू


पश्चिमी सिंहभूम, 10 जनवरी (हि.स.)।

भारतीय जनता पार्टी पश्चिमी सिंहभूम जिला इकाई ने संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत शनिवार को गीता बालमुचू को सर्वसम्मति से जिला अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके चयन को पार्टी संगठन ने महिला सशक्तिकरण, आदिवासी नेतृत्व को आगे बढ़ाने और जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं को अवसर देने के रूप में देखा है। मानव–हाथी संघर्ष के कारण क्षेत्र में बने संवेदनशील हालात को देखते हुए जिला अध्यक्ष बनाए जाने के बाद आयोजित कार्यक्रम को पूरी तरह सादगीपूर्ण रखा गया।

जिला अध्यक्ष बनने के बाद गीता बालमुचू ने कहा कि संगठन ने जो बड़ी जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, वह उसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाएंगी। उन्होंने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जैसे आदिवासी बहुल और चुनौतियों से भरे जिले में संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलना और जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देना उनकी पहली जिम्मेदारी होगी। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन और कार्यकर्ताओं के सहयोग से भाजपा जिले में और अधिक सशक्त रूप में आगे बढ़ेगी।

गीता बालमुचू पूर्व में चाईबासा नगर परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं और उनके कार्यकाल को विकास, पारदर्शिता और जनहित से जोड़कर देखा जाता है। संगठनात्मक कार्यों में उनके अनुभव और सक्रियता को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने उन्हें यह अहम दायित्व सौंपा है।

उनके जिला अध्यक्ष बनने पर पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई, पूर्व विधायक शशी सामड, पूर्व विधायक गुरुचरण नायक सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने बधाई और शुभकामनाएं दीं। पूर्व जिला अध्यक्ष संजय पांडे ने उन्हें फूल माला पहनाकर स्वागत किया और सफल कार्यकाल की कामना की।

इस अवसर पर जिले भर से आए मंडल अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष, जिला एवं नगर कमेटी के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। जिला अध्यक्ष बनने के बाद कार्यकर्ताओं ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, हालांकि मानव–हाथी संघर्ष में हुई जनहानि को देखते हुए किसी भी तरह के उत्सवधर्मी आयोजन से परहेज किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक