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बीजापुर, 10 जनवरी (हि.स.)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मार्गदर्शन एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार दंतेवाड़ा जिले के पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता विमल सुराना ने आज शनिवार को जिला मुख्यालय बीजापुर में आयोजित पत्रकारवार्ता में कहा कि मोदी सरकार द्वारा ग्राम पंचायत की शक्तियां ठेकेदारों को सौंपे जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों को अपने गांव के विकास के लिए विभिन्न कार्यों में मज़दूरों को नियोजित करने का अधिकार था। विकास कार्यों की योजना और सिफ़ारिश ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं द्वारा की जाती थी।
उन्होंने कहा कि ठेकेदारों पर प्रतिबंध था, मनरेगा का काम गांव के विकास के लिए होता था । मज़दूरों को स्थानीय मनरेगा मेट्स का सहयोग मिलता था। लेकिन अब मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद सभी फैसले दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के ज़रिये लिए जाएंगे। विकास परियोजनाएं कुछ सीमित श्रेणियों तक सिमट जाएंगी और योजना से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय मोदी सरकार लेगी। ग्राम पंचायत अपना अधिकार खो देगी और केवल मोदी सरकार के आदेशों को लागू करने वाली एजेंसी बनकर रह जाएगी। ठेकेदारों को लाया जाएगा और मज़दूरों को ठेकेदारों की परियोजनाओं के लिए लेबर सप्लाई में बदल दिया जाएगा । स्थानीय कार्यों के लिए मनरेगा मेट्स नहीं होंगे। पत्रकारवार्ता के माध्यम से कांग्रेस नेता विमल सुराना ने चार मांगें भाजपा और मोदी सरकार से की है, जिनमें काम की गारंटी, मज़दूरी की गारंटी और जवाबदेही की गारंटी देने, मनरेगा में किए गए बदलावों की तत्काल वापसी, काम के संवैधानिक अधिकार की पूर्ण बहाली और न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रति दिन किए जाने की मांग की है।
विमल सुराना ने कहा कि पहले मनरेगा के तहत देश भर के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को काम की कानूनी गारंटी प्राप्त थी। देश की किसी भी ग्राम पंचायत में किसी भी परिवार द्वारा काम मांगने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन अब मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद काम अब यह अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की मर्जी से बांटी जाने वाली एक रेवड़ी बन जाएगा और मोदी सरकार यह तय करेगी कि कौन-सी ग्राम पंचायतों को काम मिलेगा और किस ग्राम पंचायत को काम नही मिलेगा। कांग्रेस नेता विमल सुराना ने मोदी सरकार द्वारा गरीबों के मज़दूरी पाने का अधिकार छीने जाने का आरोप लगाते हुए आगे कहा कि पहले मनरेगा के तहत काम तय न्यूनतम मज़दूरी पर दिया जाता था, जिसमें हर साल बढ़ोतरी की जाती थी ।
साल के 365 दिन काम उपलब्ध रहता था, ताकि ज़रूरत पड़ने पर परिवारों के पास कमाई का विकल्प हमेशा मौजूद रहे। लेकिन अब मोदी सरकार के इन बदलावों के तहत मज़दूरी मनमाने ढंग से तय की जाएगी, न तो न्यूनतम मज़दूरी की कोई गारंटी होगी और न ही हर साल बढ़ोतरी का कोई गारंटी । फसल कटाई के मौसम में काम की अनुमति नहीं होगी, जिससे मज़दूरों की अन्य काम देने वालों से बेहतर मज़दूरी की मांग करने की ताक़त कमज़ोर होगी और उन्हें बिना न्यूनतम मज़दूरी के जो भी काम मिलेगा उसे स्वीकार करने को मजबूर किया जाएगा । उन्हाेने कहा कि भाजपा और मोदी सरकार राज्य सरकार को कमजोर कर रही है और राज्यों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। पहले मनरेगा के तहत मज़दूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकारें बिना किसी कठिनाई के काम उपलब्ध करा पाती थीं। लेकिन अब मोदी सरकार में राज्य सरकारों को मज़दूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा स्वयं राज्यों को वहन करना होगा। खर्च बचाने के लिए संभव है कि वे काम बिल्कुल भी न दें ।
कांग्रेस नेता विमल सुराना ने कहा कि मनरेगा पिछले 20 वर्षों से भारत के मजदूरों की जीवनरेखा रही है। मनरेगा के तहत लगभग 10 करोड़ परिसंपत्तियों का निर्माण किया गया, जिनमें गांवों के तालाब और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं । उन्हाेने कहा कि कैग ऑडिट सहित 200 से अधिक अध्ययनों ने यह दिखाया है कि मनरेगा देश की सबसे प्रभावी और सफल योजनाओं में से एक है। भाजपा और मोदी सरकार के कारण हाज़िरी और कार्यों के डिजिटल सत्यापन के लिए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) ऐप लागू करने और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (एबीपीएस) को अनिवार्य करने से दो करोड़ मज़दूरों से काम का अधिकार और उनकी वाजिब मज़दूरी छिन गई है।
इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर के अध्यक्ष लालू राठौर, शंकर कुडियम, जिला नीना रावतिया, सोनू पोटाम, कमलेश कारम, ज्योति कुमार, सुखदेव नाग, मनोज अवलम, रमेश यालम, कलाम खान, सुनील उद्दे, जितेंद्र हेमला,संजना चौहान, एजाज अहमद सिद्दीकी, कामेश मोरला, बबीता झाड़ी, इद्रिश ख़ान, नेहरू बघेल, कामेश मोरला, संजना चौहान, बबीता झाड़ी, सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे ।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे