Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

नई दिल्ली, 10 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली के परिवहन विभाग ने 3,330 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक बसों की तत्काल खरीद के लिए केंद्र सरकार की एजेंसी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को एक बयान में बताया कि दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाना और नागरिकों को एक आधुनिक, सुगम और सस्ती सार्वजनिक परिवहन सेवा देना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य के साथ हाल ही में सीईएसएल के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि पीएम ई-ड्राइव योजना (फेज-2) के तहत दिल्ली के लिए बसों का कोटा बढ़ाया जाए।
मुख्यमंत्री के अनुसार अपनी आवश्यकता का पुनर्मूल्यांकन करते हुए विभिन्न आकारों की बसों की मांग रखी है ताकि संकरी सड़कों से लेकर मुख्य मार्गों तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके। राजधानी के परिवहन विभाग द्वारा 7 मीटर की 500 बसें, 9 मीटर की 2,330 बसें और 12 मीटर की 500 बसों समेत कुल 3,330 की मांग की गई है। सभी बसें लो फ्लोर एसी बसें होंगी। 7 मीटर की बसें दिल्लीवासियों को संकरी सड़कों और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। 9 मीटर की बसें छोटी सड़कों और फीडर सेवाओं के लिए चलाई जाएंगी। वहीं, 12 मीटर की बसें मुख्य रूटों और भारी भीड़ वाले मार्गों पर चलाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने केंद्र सरकार और भारी उद्योग मंत्रालय से अनुरोध किया है कि दिल्ली की इस अतिरिक्त मांग को सब्सिडी मॉडल में शामिल किया जाए। मुख्यमंत्री ने दिल्लीवासियों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए स्पष्ट किया है कि यदि सब्सिडी में कोई तकनीकी अड़चन आती है तो दिल्ली सरकार स्वयं इस लागत का भार उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है ताकि बसों की खरीद में कोई देरी न हो। मुख्यमंत्री का मानना है कि ये 3,330 नई बसें न केवल सार्वजनिक परिवहन का साधन हैं, बल्कि दिल्ली के ‘ग्रीन ट्रांजिशन’ का आधार भी बनेंगी। इन बसों के आने से दिल्लीवासियों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही हवा में घुलने वाले हानिकारक धुएं में भारी कमी आएगी। महिला यात्रियों और बुजुर्गों के लिए लो-फ्लोर बसों के माध्यम से यात्रा अधिक सुरक्षित और आरामदायक होगी। दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले महीनों में दिल्ली का बस बेड़ा दुनिया के सबसे बड़े और सबसे स्वच्छ इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क में से एक बन जाए।
सरकार के मुताबिक दिल्ली में वर्तमान में कुल 5,336 सरकारी बसें चलाई जा रही हैं। इनमें कुल 3,535 ईवी बसें हैं, जिसमें 9 मीटर वाली 1,162 देवी बसें, 12 मीटर वाली 2,273 बसें और 100 फीडर बसें शामिल हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार इस वर्ष मार्च तक दिल्ली की सड़कों पर 5,000 से ज्यादा ईवी बसें संचालित हो जाएंगी। उनका संकल्प है कि वर्ष 2026 के अंत तक 7000 इलेक्ट्रिक बसें दिल्लीवासियों को उपलब्ध करा दी जाएंगी। पीएम ई-ड्राइव (चरण 1) की 2800 बसें आने के बाद दिल्ली में बसों की संख्या 10,430 हो जाएगी तथा पीएम ई-ड्राइव (चरण 2) की 3330 बसें आने के बाद दिल्ली में बसों की संख्या 13,760 हो जाएगी।
प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना भारत सरकार की एक क्रांतिकारी पहल है, जिसे भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा 10,900 करोड़ रुपये के बजट के साथ अक्टूबर 2024 से मार्च 2026 तक के लिए लागू किया गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, ई-बसों और ई-ट्रकों की खरीद पर वित्तीय प्रोत्साहन देकर ईवी (ईवी) अपनाने की प्रक्रिया को तेज करना और देश में प्रदूषण कम कर वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। इसके तहत न केवल बेंगलुरु, दिल्ली और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती की जा रही है, बल्कि 72,300 फास्ट चार्जर और एक डिजिटल ‘सुपर ऐप’ के माध्यम से चार्जिंग के बुनियादी ढांचे को भी सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि भारत को नेट-जीरो उत्सर्जन और आत्मनिर्भर विनिर्माण के लक्ष्य की ओर ले जाया जा सके।
सीईएसएल केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। यह मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (ई-बस, ई-कार, ई-ट्रक) और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों को बढ़ावा देने के लिए काम करता है, जैसे कि इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए बड़े टेंडर निकालना और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना।
-----------
हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव