दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने दिए दो नए बीएमडब्ल्यू ट्रीटमेंट प्लांट की प्रक्रिया शुरु करने के निर्देश
नई दिल्ली, 30 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को राजधानी में दो अत्याधुनिक बॉयो-मेडिकल वेस्ट (बीएमडब्ल्यू) ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए तत्काल व्यवहार्यता अध्ययन शुरू करन
दिल्ली के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा  (फाइल फोटो)


नई दिल्ली, 30 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को राजधानी में दो अत्याधुनिक बॉयो-मेडिकल वेस्ट (बीएमडब्ल्यू) ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के लिए तत्काल व्यवहार्यता अध्ययन शुरू करने के निर्देश दिए।

साथ ही मंत्री ने नॉन-बेडेड क्लिनिकों के लिए बीएमडब्ल्यू सेवा शुल्क तार्किक करने का औपचारिक प्रस्ताव पेश करने को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) से कहा, क्योंकि वर्तमान शुल्क उनकी न्यूनतम वेस्ट अमाउंट को नहीं दर्शाते। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि वे स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह को इस आवश्यकता और तथ्यों से अवगत कराएंगे।

मंत्री ने कहा कि यदि बॉयो-मेडिकल कचरा अनुपचारित छोड़ दिया गया तो यह जन-स्वास्थ्य और वायु-गुणवत्ता के लिए गंभीर खतरा है। दो आधे-एकड़ के मौजूदा प्लांट पूरे शहर के 40 एमटी दैनिक भार को अनिश्चितकाल तक नहीं उठा सकते। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विकसित दिल्ली दृष्टिकोण के अनुरूप और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में हम इस कैपेसिटी गैप को इनोवेटिव व मापनीय समाधानों से जल्द दूर करने के लिए कार्यरत हैं।

पिछले कई हफ्तों में की कई समीक्षा बैठकों में अधिकारियों ने बताया कि 3 करोड़ से ज्यादा आबादी वाले दिल्ली की स्वास्थ्य-व्यवस्था मौजूदा बीएमडब्ल्यू क्षमता से कहीं अधिक है। मंत्री ने बताया कि लगभग 3.16 करोड़ आबादी वाले पड़ोसी हरियाणा में 11 बीएमडब्ल्यू प्लांट हैं, जबकि दिल्ली में केवल दो। उन्होंने कहा कि हमने बड़ी कमिया विरासत में पाई, पर यह सरकार छोटी से छोटी कमियों को, बहु-स्तरीय पहल के जरिए खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आगामी प्लांट न सिर्फ क्षमता बढ़ाएंगे, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल आधुनिक तकनीक भी अपनाएंगे जो राष्ट्रीय उत्सर्जन मानकों के अनुरूप होगी।

मंत्री ने बताया कि अब तक बिना बिस्तर वाली क्लिनिकें उतनी ही दरें चुका रही थीं जितनी 1-7 बिस्तर की सुविधाएं देती हैं। डीजीएचएस से अनुरोध किया गया है कि वह एडवाइजरी कमेटी में प्रस्ताव रखे ताकि इन क्लिनिकों के लिए कम दरें तय हों और व्यवसायिक न्याय सुनिश्चित हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव