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हरियाणा का तर्क बारिश में कम हुई मांग
चंडीगढ़, 30 अगस्त (हि.स.)। पंजाब व हरियाणा के बीच भाखड़ा के पानी को लेकर कई माह से चल रहे विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब हरियाणा ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) और पंजाब सरकार को पत्र लिखकर पंजाब की तरफ से छोड़े जा रहे पानी को कम करने के लिए कहा है। कृषि और पेयजल जरूरतों का हवाला देते हुए राज्य सरकार अतिरिक्त सप्लाई चाहती थी। लेकिन अब जब खुद हरियाणा की नदियां उफान पर हैं तो उसने पानी कम करने का प्रस्ताव रखा है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हालही में एक पत्र लिखकर बाढ़ के समय में पंजाब को हर संभव मदद के लिए प्रस्ताव दिया था। पंजाब के दस जिले इस समय बाढ़ की चपेट में हैं। मुख्यमंत्री के पत्र के बाद विभागीय अधिकारियों का यह पत्र समाने आ गया है। हरियाणा सरकार ने तर्क दिया है कि बारिश के चलते पानी की डिमांड घटी है। जिससे दोनों राज्यों के बीच फिर से विवाद खड़ा हो सकता है। हरियाणा सरकार ने कहा है कि उसकी नहरों की ओर छोड़े जाने वाले 2,500 क्यूसेक पानी को कम किया जाए।
पत्र में कहा गया है कि 29 अगस्त 2025 को हरियाणा कॉन्टैक्ट प्वाइंट पर पानी का डिस्चार्ज 8 हजार 894 क्यूसेक पाया गया, जबकि हरियाणा ने 7 हजार 900 क्यूसेक की मांग की थी। इससे पहले 26 अगस्त 2025 को हरियाणा ने इंडेंट घटाकर 7 हजार 900 क्यूसेक किया था, लेकिन पानी का डिस्चार्ज कम नहीं किया गया। अब लगातार भारी बारिश होने के कारण नहर क्षेत्र और कैचमेंट एरिया में पानी की मांग और घट गई है। इसी वजह से 29 अगस्त 2025 को एक और नया मांग पत्र दिया गया है, जिसमें केवल 6 हजार 250 क्यूसेक पानी की जरूरत बताई गई है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा