Enter your Email Address to subscribe to our newsletters
लखनऊ, 30 अगस्त (हि. स.)। उत्तर प्रदेश के समेकित विकास का खाका खींचकर समाज के सबसे निचले पायदान पर स्थित विमुक्त व घुमंतू जातियों को सरकारी योजनाओं के जरिए संतृप्त करने का योगी सरकार का संकल्प नित नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। प्रदेश के विमुक्त व घुमंतू जातियों तक मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के साथ ही उनके आर्थिक व सामाजिक उन्नयन के अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, रविवार को 'विमुक्त जाति दिवस' के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी प्रदेश में विमुक्त व घुमंतू जातियों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करेंगे।
समाज कल्याण विभाग के भागीदारी भवन में रविवार को साढ़े दस बजे आयजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी के साथ ही नरेंद्र कश्यप, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार-पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग), असीम अरुण, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार-समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण), संजीव कुमार गोंड राज्यमंत्री (समाज कल्याण अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण) की उपस्थिति में प्रदेश में विमुक्त व घुमंतू जातियों को लेकर जारी विकासोन्मुख योजनाओं के बारे में व्यापक संवाद व चर्चा का आयोजन होगा।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी का विजन इन विमुक्त व घुमंतू जाति के लोगों को “विकास की मुख्यधारा” में लाने पर केन्द्रित है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की नीति एवं विजन के तहत विमुक्त जाति के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक उत्थान पर फोकस किया जा रहा है।
--इसलिए मनाया जाता है 'विमुक्त जाति दिवस'
दशकों तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहे विमुक्त व घुमंतू जातियों के कल्याण के लिए प्रदेश में कई प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। 'विमुक्त जाति दिवस' मनाये जाने का मुख्य उद्देश्य ही विमुक्त, घुमन्तू और अर्द्ध घुमन्तू जनजातियों (डीनोटिफाइड, नोमैडिक एंड सेमी नोमैडिक-डीएनटी) के अधिकारों के प्रति के प्रति समाज का ध्यान आकर्षित करते हुए इन समुदायों को सामाजिक न्याय, समानता और गरिमा दिलाने के लिए जन-जागरूकता फैलाना है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अन्तर्गत गठित विमुक्त, घुमन्तू व अर्द्ध घुमन्तू जनजाति आयोग की सूची के अनुसार उत्तर प्रदेश में विमुक्त् समुदाय, जातियों की संख्या 59 है, जबकि घुमन्तु समुदाय जातियों की संख्याए 29 है। विमुक्त जाति के लोग सामान्यतः भूमिहीन व खेतिहर मजदूर हैं, जो कच्चे मकानों एवं झोपड़ी में निवास करते हैं। इसमें नट, बंजारा, बावरी, सांसी, कंजर एवं कालवेलिया आदि समूह प्रमुख हैं।
--शिक्षा, निवास तथा आजीविका के माध्यम सुनिश्चित कर रही सरकार
प्रदेश सरकार विमुक्त जातियों की शिक्षा, निवास तथा आजीविका को सुनिश्चित किया जा रहा है। शिक्षा के लिए समाज कल्याण विभाग कक्षा 6 से 12 तक रामपुर, फर्रुखाबाद, सारनाथ, चन्दापुर, लखनऊ, गोरखपुर, गोण्डा, दुद्धी (सोनभद्र) तथा हसनपुर (सुल्तानपुर) के रूप में कुल 9 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित किये जा रहे हैं। वहीं, प्रयागराज तथा बालागंज में दो आवासीय विद्यालय भी अनुदान पर संचालित हैं।
प्रदेश में 101 आश्रम पद्धति संचालित विद्यालयों के माध्यम से भी विमुक्त जातियों को लाभान्वित किया जा रहा है। छात्रों को आवासीय विद्यालयों में भोजन, स्कूल ड्रेस, पुस्तकें आदि योगी सरकार नि:शुल्क उपलब्ध करा रही है। स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से प्रतापगढ़ में 02 तथा लखीमपुर खीरी में 01 समेत कुल 03 छात्रावास संचालित है।
वहीं, विभाग स्थापित 264 राजकीय अनुसूचित जाति छात्रावासों में भी विमुक्त जाति के छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाता है। विमुक्त जातियों की आजीविका, शिक्षा व निवास के लिए कानपुर के कल्याणपुर, लखीमपुर खीरी के साहबगंज, मुरादाबाद के फजलपुर में निवास व कृषि योग्य भूमि के पट्टों पर आवंटन किया गया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / दीपक