गोबिंद सागर में डाला 7.40 लाख मछलियों का बीज, स्थानीय मछुआरों को मिलेगा लाभ
ऊना, 30 अगस्त (हि.स.)। प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और मत्स्य व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से गोविंद सागर झील के रायेपुर मैदान क्षेत्र में शनिवार को बड़े पैमाने पर मत्स्य बीज संचयन किया गया। इस दौरान जलाशय में कुल
गोबिंद सागर में डाला मछली बीज।


ऊना, 30 अगस्त (हि.स.)। प्रदेश में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने और मत्स्य व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से गोविंद सागर झील के रायेपुर मैदान क्षेत्र में शनिवार को बड़े पैमाने पर मत्स्य बीज संचयन किया गया। इस दौरान जलाशय में कुल 7,40,960 मछलियों का बीज डाला गया, जिनमें कतला प्रजाति की 4,81,182 तथा सिल्वर कार्प की 2,59,778 मछलियाँ शामिल रहीं।

इस दौरान मत्स्य विभाग ऊना के सहायक निदेशक विवेक शर्मा, सहायक निदेशक मत्स्य विभाग बिलासपुर, मत्स्य संरक्षण अधिकारी, मत्स्य अधिकारी मंदली, रायेपुर पंचायत के प्रतिनिधि तथा मंदली और दोबड़ मत्स्य सहकारी सभा के सदस्य एवं स्थानीय मछुआरे मौजूद रहे।

विवेक शर्मा ने कहा कि मत्स्य बीज संचयन की यह प्रक्रिया मत्स्य पालन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इससे न केवल जलाशय में मछलियों की संख्या बढ़ेगी बल्कि भविष्य में उत्पादन भी कई गुना बढ़ने की संभावना है। इस पहल से क्षेत्र के मछुआरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और ग्रामीण आजीविका को मजबूती प्रदान होगी। उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनता जा रहा है। प्रदेश सरकार समय-समय पर इस दिशा में कदम उठा रही है और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हुए मछली उत्पादन को बढ़ाने के लिए ठोस योजनाएँ बना रही है। उन्होंने कहा कि गोबिंद सागर झील राज्य का एक प्रमुख मत्स्य संसाधन है, जहाँ हर वर्ष बीज संचयन कर मछलियों की नस्ल को संरक्षित और संबर्धित किया जाता है।

इस मौके पर स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों और मछुआरों ने भी मत्स्य विभाग का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह की पहल से उनकी आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने विभाग से आग्रह किया कि भविष्य में भी ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहें ताकि मछली पालन व्यवसाय को और गति मिल सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकास कौंडल