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जौनपुर, 30 अगस्त (हि.स.)‘’खेल दिवस’’ के दूसरे दिन शनिवार को राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव द्वारा सर्वप्रथम मेजर ध्यानचन्द के चित्र पर मार्ल्यापण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी और जनपद स्तरीय जूनियर बालक एवं बालिका एथलेटिक्स तथा जूनियर बालक खो-खो प्रतियोगिता का उद्घाटन किया गया। ’’खेल शक्ति के माध्यम से एक सक्षम, समावेषी और सक्रिय भारत निर्माण के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता’’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन पूर्वांचल विश्वविद्यालय के महन्त अवैद्यनाथ सभागार में किया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि गिरीश चन्द्र यादव, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), खेल एवं युवा कल्याण विभाग उ0प्र0 सरकार एवं कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रो0 वन्दना सिंह, कुलपति, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय उपस्थित थी।
इस अवसर पर खेल विभाग एवं बेसिक शिक्षा विभाग के उन खिलाड़ियों को मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा जिन्होंने पर खेल कौशल से प्रदेश व देश का नाम गौरवान्वित किया, को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कम्पोजिट विद्यालय तारा उमरी की छात्रा दीपिका विश्वकर्मा ने अपने ओजस्वी व देश भक्ति से परिपूर्ण गीत से पूरे सभागार का माहौल देश-प्रेम से ओत-प्रोत कर दिया। कुलपति डॉ वंदना सिंह द्वारा अपने सम्बोधन में खेल को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताते हुए जीवन जीने की कला भी सिखाता है, इस बात पर बल दिया गया। मुख्य अतिथि द्वारा अपने सम्बोधन में भारत सरकार द्वारा खेल दिवस पर 03 दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा बताने के साथ बताया कि खेल ही एक ऐसी विधा है जिससे बौद्धिक एवं शारीरिक क्षमता का विकास होता है। एक घंटा खेल के मैदान में’’कोट को रेखांकित करते हुए कहा गया कि गम्भीर बीमारी से मुक्ति का इलाज भी खेल है तथा एक स्वस्थ व्यक्ति ही प्रदेश एवं देश की प्रगति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
मंत्री द्वारा अपने उद्बोधन में खेलो इण्डिया, सांसद खेलकूद स्पर्धा के साथ ही विधायक खेलकूद स्पर्धा को भी कराये जाने की योजना बनायी जा रही है तथा पहली बार सन् 2023 में उ0प्र0 में पहली बार सुनियोजित खेल नीति बनायी गयी इसका भी उल्लेख किया गया। खेल विभाग द्वारा संचालित योजना ’’एकलव्य क्रीड़ा कोष’’के बारे में उल्लेख करते हुए मुख्य अतिथि द्वारा यह बताया गया कि इस योजना के अन्तर्गत आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभावान खिलाड़ी की आर्थिक सहायता यथा- पौष्टिक आहार, खेल उपकरण या विदेश में जाकर खेल का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है। साथ ही प्रदेश में पहली बार खिलाड़ियों के लिए समस्त विभागों में 2 प्रतिशत के आरक्षण की मजबूत व्यवस्था का उल्लेख किया गया। सन् 2036 में ओलम्पिक खेल की अपने देश की दावेदारी के दृष्टिगत मंत्री द्वारा युवाओं एवं खिलाड़ियों से नशे के विरूद्ध आन्दोलन प्रारम्भ करने का आह्वाहन करते हुए अपने सगे-सम्बन्धियों से नशे को छोड़ने उल्लेख किया गया, ताकि भारत आने वाले दिनों विकसित, समृद्ध एवं सशक्त देश बन सके।संगोष्ठी का संचालन डॉ0 राजेश सिंह, वरिष्ठ बास्केटबाल खिलाड़ी के द्वारा किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / विश्व प्रकाश श्रीवास्तव