मनरेगा से डबरी निर्माण से बदली संतोष की किस्मत
जांजगीर-चांपा, 30 अगस्त (हि.स.)। जिले की जनपद पंचायत बलौदा के ग्राम खैजा में महात्मा गांधी नरेगा योजना से एक बड़ी सफलता की कहानी सामने आई है। ग्राम के किसान संतोष कुमार/बाबूराम की निजी भूमि पर लगभग 2.92 लाख रुपए की लागत से डबरी (छोटा तालाब) का निर्माण
जांजगीर : मनरेगा से डबरी निर्माण से बदली संतोष की किस्मत


जांजगीर-चांपा, 30 अगस्त (हि.स.)। जिले की जनपद पंचायत बलौदा के ग्राम खैजा में महात्मा गांधी नरेगा योजना से एक बड़ी सफलता की कहानी सामने आई है। ग्राम के किसान संतोष कुमार/बाबूराम की निजी भूमि पर लगभग 2.92 लाख रुपए की लागत से डबरी (छोटा तालाब) का निर्माण किया गया। इस कार्य से न केवल 552 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ बल्कि गांव के 13 परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ भी मिला। मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत जिले में सतत रूप से गतिविधियां भी संचालित की जा रही है।

संतोष कुमार पाटले बताते है कि वे पहले बतख का पालन करते थे, डबरी नही होने से पहले वह छोटा गड्ढा खोदकर बतखों का पालन कर रहे थे। निजी डबरी निर्माण होने से पहले संतोष बेहद परेशान रहते थे, क्योंकि उनके खेतों में साल भर पानी की उपलब्धता नहीं होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में एक दिन उन्हें रोजगार सहायक के माध्यम से जल संरक्षण के तहत निजी डबरी निर्माण से होने वाले फायदे के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने आवयक दस्तावेज सहित आवेदन ग्राम सभा में दिया और ग्राम सभा से यह प्रस्ताव पास हुआ, तो तकनीकी प्रस्ताव तैयार कर उसे जनपद पंचायत के माध्यम से जिला पंचायत प्राासकीय स्वीकृति के लिए भेजा गया। इसके बाद संतोष कुमार की जिंदगी में बदलाव आया जब उनके खेतों में डबरी निर्माण को लेकर 2 लाख 92 हजार रूपये की प्राासकीय राशि स्वीकृत दी गई। इसके बाद फिर काम शुरू हुआ और महात्मा गांधी नरेगा के जॉबकार्डधारी परिवारों ने मिलकर संतोष कुमार पाटले की डबरी का निर्माण कर दिया।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना से उनके स्वयं के जमीन पर डबरी निर्माण होने अब वे बतखो का पालन शुरू किये और अभी वह मछली पालन का कार्य कर रहे हैं। इससे उन्हें डबरी में मछली से हर साल 25 हजार से 30 हजार की अतिरिक्त आय हो रही है। अब खेतों की सिंचाई आसानी से हो पा रही है, जिससे धान और अन्य फसलों का उत्पादन बढ़ा है। डबरी के पानी से पशुओं के लिए भी पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो गई।

संतोष कुमार पाटले ने कहा क‍ि, मनरेगा योजना ने मेरी जिंदगी बदल दी। पहले खेतों में पानी की समस्या रहती थी और आमदनी सीमित थी, लेकिन अब डबरी से खेती आसान हो गई है। मछली पालन और सिंचाई से आमदनी में अच्छी खासी बढ़ोतरी हो रही है। ग्राम पंचायत खैजा के सरपंच और रोजगार सहायक ने बताया कि, डबरी निर्माण से गांव में कृषि उत्पादन, मछली पालन और पशुपालन को नई दिशा मिली है। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरी है बल्कि मनरेगा योजना की सार्थकता भी गांव-गांव में दिखाई दे रही है। मनरेगा द्वारा निर्मित एक डबरी कैसे किसान और गांव दोनों की आर्थिक स्थिति को बदल सकती है और स्थायी आजीविका का साधन बन सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार/ हरीश तिवारी

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हिन्दुस्थान समाचार / हरीश तिवारी