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मॉस्को, 30 अगस्त (हि.स.)। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस और चीन दोनों राष्ट्रों की समृद्धि के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। पुतिन ने कहा कि वह चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग की नई संभावनाओं और उपायों पर गहन चर्चा करेंगे।
रुसी राष्ट्रपति पुतिन ने यह बात चीन रवाना होने की पूर्व संध्या पर समाचार एजेंसी शिन्हुआ को दिए एक लिखित साक्षात्कार में कही। पुतिन चीन के तियानजिन शहर में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन और बीजिंग में चीन की स्वतंत्रता दिवस सैन्य परेड में हिस्सा लेंगे।
पुतिन ने साक्षात्कार में मई में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की रूस यात्रा को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि शी दृढ़ इच्छाशक्ति वाले व्यक्ति हैं। वह रणनीतिक दृष्टि और वैश्विक दृष्टिकोण से संपन्न हैं। राष्ट्रीय हितों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अडिग हैं। राष्ट्रपति पुतिन ने जोर देकर कहा, रूस यह कभी नहीं भूलेगा कि चीन ने 1941-1942 के सबसे कठिन महीनों में जापान को सोवियत संघ की पीठ में छुरा घोंपने से रोका।
उन्होंने कहा कि रूस और चीन द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास को विकृत करने के किसी भी प्रयास की कड़ी निंदा करते हैं। पुतिन ने कहा, उस युद्ध के परिणाम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अन्य अंतरराष्ट्रीय समझौतों में निहित हैं। वे अपरिवर्तनीय हैं और उनमें संशोधन नहीं किया जा सकता। पुतिन ने कहा कि रूस और चीन के बीच आर्थिक संबंध अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गए हैं। 2021 से द्विपक्षीय व्यापार में लगभग 100 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है।
चीन अब तक रूस का अग्रणी साझेदार है। रूस और चीन के बीच लेन-देन लगभग पूरी तरह से रूबल और युआन में होता है।
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस तेल और गैस के प्रमुख निर्यातक के रूप में चीन में अपनी स्थिति मजबूती से बनाए हुए है। उन्होंने कहा, रूस, चीनी कार निर्यात के लिए दुनिया के प्रमुख बाजारों में से एक है। पुतिन ने कहा कि 2030 तक दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर केंद्रित 100 से अधिक परियोजनाएं आकार ले लेंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद