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धर्मशाला, 30 अगस्त (हि.स.)। छात्र भविष्य में किस दिशा में जाएगा इस बात का पता बताने वाले जिस होलेस्टिक कार्ड को अभी तक एनसीईआरटी लागू नहीं कर पाई उसे हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड लागू करने जा रहा है। बोर्ड के अध्यक्ष डा. राजेश शर्मा ने शनिवार को यह जानकारी छह दिवसीय कार्यशाला के समापन पर पत्रकारों से बातचीत में साझा करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिक्षा के स्तर को सुधारने का जो संकल्प लिया है, उसे प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड पूरा करेगा। जिससे प्रदेश के बच्चे सिर्फ किताबी कीड़ा न रह जाएं। इसलिए छात्रों की स्किल को भी डिवेलप किया जा रहा है।
डा. शर्मा ने कहा कि हिमाचल बोर्ड देश का पहला ऐसा बोर्ड है जो एनसीईआरटी से भी पहले नौंवी से जमा दो तक के छात्रों के भविष्य की योजना पर उनकी पढ़ाई के दौरान अध्ययन कर एक होलेस्टिक कार्ड में तैयार करेगा। इसके लिए मास्टर ट्रेनर तैयार कर दिए गए हैं जो आने वाले दिनों में सरकारी व निजी स्कूलों के शिक्षकों को ट्रेंड करेंगे। इसमें छात्रों, अभिभावकों एवं शिक्षकों सभी भी अहम भूमिका होगी और जब विद्यार्थी प्लस टू की पढ़ाई पास करके निकलेगा तो उसके बाद उसके भविष्य में जाने वाले दिशा को इंगित करने वाला एक महत्पूर्ण कार्ड होगा।
डा. शर्मा ने कहा कि बोर्ड ने समग्र शिक्षा और एनसीईआरटी, परख के सहयोग एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में शिक्षकों को ट्रेंड किया है। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य होलास्टिक प्रोग्रेस कार्ड (सेकेंडरी स्टेज) का प्रारूप तैयार करना रहा। यह कार्ड छात्रों के मूल्यांकन का एक नया तरीका है, जो रटने की प्रवृत्ति से हटकर छात्रों की रचनात्मकता और योग्यता-आधारित मूल्यांकन पर जोर देता है। इसके तहत छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ उनके बौद्धिक, भावनात्मक, शारीरिक, रुचि, भागीदारी और सामाजिक कौशल का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
छात्रों को पहली बार प्रश्न बैंक देगा बोर्ड
इसके अलावा क्षमता-आधारित प्रश्न पत्र और प्रश्न बैंक तैयार करने पर भी काम किया जाएगा। ये प्रश्न पत्र विद्यार्थियों के समग्र विकास और आगामी परीक्षाओं के लिए लाभदायक साबित होंगे। बोर्ड शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए ये प्रश्न पत्र और प्रश्न बैंक सितंबर महीने तक बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध करा देगा। यह नई छात्रों को आनलाईन घर बैठे सुविधा देगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया