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ग्वालियर, 30 अगस्त (हि.स.)। मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर अपने भीतर संगीत, कला एवं समृद्ध संस्कृति ही नहीं समेटे है, अनुपम कलाकृतियां गढ़ने का हुनर भी ग्वालियर-चंबल अंचल के निवासियों में गहरे तक समाया है। ग्वालियर, चंबल एवं सागर संभाग में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्वालियर में आयोजित दो दिवसीय रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में इन अंचलों के उत्कृष्ट कलात्मक उत्पादों की प्रदर्शनी ने देश भर से आए टूर ऑपरेटर्स, पर्यटन निवेशकों एवं कलाप्रेमियों के मानस पटल पर गहरी छाप छोड़ी है। प्रदर्शनी में सजी आकर्षक कलाकृतियों को देखकर ऐसा आभास हुआ मानो वे आमंत्रण दे रहीं हैं कि आइये और अपने घर व प्रतिष्ठान को सजाने-संवारने के लिए हमें लेकर जाइए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में शनिवार को ग्वालियर पर्यटन कॉन्क्लेव में साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 6 निवेशकों को लैटर ऑफ अलॉटमेंट प्रदाय किये गये, इससे 60 करोड़ से अधिक का निवेश और बड़ी संख्या में रोजगार सृजन होगा। कॉन्क्लेव में लगी प्रदर्शनी में एक से बढ़कर एक कलात्मक वस्तुएँ लेकर आए शिल्प कलाकार, पर्यटन निवेशकों से मिले अच्छे प्रतिसाद से खासे उत्साहित नज़र आए। प्रदर्शनी में टेराकोटा शिल्प, लकड़ी से गढ़े गए कलात्मक खिलौने, पेचवर्क युक्त हेंडलूम के मनमोहक परिधान, सिक्की आर्ट से सजी सुंदर-सुंदर तस्वीरें, पेपर बांस से निर्मित खिलौने, रेजिन आर्ट व रंग-बिरंगे कपड़ों से बने गुड्डे - गुड़ियां देखते ही बन रहे थे।
रेजिन आर्ट से बनी आकर्षक सजावटी कलाकृतियाँ लेकर आईं हुज़रात रोड लश्कर निवासी जागृति सुनेजा बोलीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर में रीजनल टूरिस्ट कॉन्क्लेव आयोजित कर हम जैसे शिल्पियों के उत्पादों को बाज़ार मुहैया कराने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराया है। बहुत से पर्यटन निवेशकों ने मेरे उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई है और मुझसे कार्ड लेकर गए हैं। इसी तरह ग्वालियर शहर के गंजीवाला मोहल्ला, लक्कड़ खाना से आए अमर सिंह माहौर के पेपर बांस खिलौने के स्टॉल पर कला पारखियों की अच्छी खासी भीड़ जुटी थी। वहीं हुज़रात कोतवाली लश्कर निवासी भारत सिंह परिहार व उनकी धर्मपत्नी द्वारा रंग-बिरंगे कपड़ों से बनाई गई बत्तो बाईगुड़िया, अन्य शो-पीस व अक्षय तृतीया जैसे पवित्र त्यौहारों पर पूजी जाने वाली देवी-देवताओं की कपड़ों से बनीं मूर्तियां भी कॉनक्लेव के प्रतिभागियों को बेहद पसंद आईं।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ग्वालियर की डॉल मेकर बत्तो बाई की गुड़िया उनकी पोती कामिनी बाई ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को भेंट की। ग्वालियर की इस स्थानीय कला का प्रचार मध्यप्रदेश पर्यटन कर रहा है। विभाग की वेबसाइट पर बत्तो बाई डॉल के नाम से दो इंच से लेकर दो फीट तक तैयार की जाने वाली इन गुड़िया की जानकारी दी जा रही है। कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के पर्यटन स्थलों, संस्कृति, गतिविधियों, होटल्स और आयोजनों पर आधारित फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर